श्रम योग्य कार्यबल में बेरोजगारी जुलाई-सितंबर तिमाही में घट कर 5.2 प्रतिशत पर

नयी दिल्ली, 10 नवंबर (वार्ता) सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी त्रैमासिक (जुलाई-सितंबर, 2025) श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अनुसार सितंबर में समाप्त तिमाही के दौरान देश में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों की श्रम बल में भागीदारी मामूली सुधार के साथ 55.1 प्रतिशत पर पहुंच गयी और इस दौरान इस वर्ग की आबादी में बेरोजगारी 0.2 प्रतिशत घट कर 5.2 प्रतिशत के स्तर पर आ गयी।
इस वर्ष अप्रैल जून तिमाही में श्रम योग्य आबादी के 55.0 प्रतिशत लोग समग्र रूप से श्रम बल में शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार शहरों में सेवा (तृतीयक क्षेत्र) रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है जबकि कृषि कार्य और स्वरोजगार ग्रामीण क्षेत्र की श्रम योग्य आबादी के रोजगार का प्रमुख सहारा है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर तिमाही में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में श्रम बल में समग्र भागीदारी में मामूली वृद्धि देखी गई – ग्रामीण क्षेत्र में श्रम बल में भागीदारी की दर 57.1 प्रतिशत से बढ़कर 57.2 प्रतिशत हो गई, जबकि शहरी क्षेत्र में यह औसत इससे पिछली तिमाही के 50.6 प्रतिशत से हल्का बढ़ कर 50.7 प्रतिशत हो गया। रिपोर्ट के अनुसार श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी अप्रैल-जून, 2025 के 33.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर, 2025 में 33.7 प्रतिशत के स्तर पर रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि आबादी में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) अप्रैल-जून, 2025 के 52.0 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर, 2025 में 52.2 प्रतिशत हो गया। अप्रैल-जून, 2025 की तुलना में जुलाई-सितंबर, 2025 के दौरान सभी क्षेत्रों – ग्रामीण, शहरी और समग्र – में महिला डब्ल्यूपीआर में वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों में बेरोजगारी दर पिछली तिमाही के 5.4 प्रतिशत से घटकर जुलाई-सितंबर, 2025 में 5.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान कृषि क्षेत्र में लगे श्रमिकों की ग्रामीण रोजगार में हिस्सेदारी इससे पिछली तिमाही के 53.5 प्रतिशत से बढ़ कर 57.7 प्रतिशत हो गयी। मंत्रालय का कहना है कि खरीफ की खेती-बाड़ी के कार्यों के लिए श्रम बल की मांग के कारण यह वृद्धि हुई है। शहरी तृतीयक (सेवा) क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों की हिस्सेदारी जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान मामूली रूप से बढ़कर 62.0 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 61.7 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-रोजगार में लगे श्रमिकों की संख्या अप्रैल-जून 2025 में 60.7 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान 62.8 प्रतिशत हो गई, जो एक उल्लेखनीय वृद्धि है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शहरी क्षेत्रों में नियमित वेतन पाने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों की संख्या में मामूली सुधार दर्ज किया गया, जो पिछली तिमाही के 49.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान 49.8 प्रतिशत हो गई।

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