बीएलओ नियुक्ति में गड़बड़ी से लोकतंत्र को खतरा

इंदौर. प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बूथ लेवल ऑफिसर की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली और मनमानी करने का मामला सामने आया है. निर्वाचन आयोग भाजपा के दबाव में काम कर रहा है. बीएलओ नियुक्ति में गड़बड़ी से लोकतंत्र को खतरा है.

यह आरोप पूर्व मंत्री और कांग्रेस राज्य स्तरीय एसआईआर मॉनीटरिंग कमेटी के चेयरमैन सज्जन सिंह वर्मा ने लगाया है. वरिष्ठ कांग्रेस नेता वर्मा ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। कई जिलों में फारेस्ट गार्ड, मिड-डे मील कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिका, और आउटसोर्स कर्मियों जैसे गैर-सरकारी कर्मचारियों को बीएलओ नियुक्त किया गया है. यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मतदान सूची की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. वर्मा ने सवाल उठाया कि जब अनुबंधित कर्मचारी और गैर-सरकारी व्यक्ति बीएलओ बनाए जाएंगे, तो मतदाता सूची की विश्वसनीयता कैसे तय होगी? क्या यह आस्थाई कर्मचारी स्थाई होने के लिए भाजपा की राज्य सरकार के अधीन मतदाता सूची को प्रभावित नहीं करेंगे? आयोग और प्रशासन की यह मनमानी लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय चुनाव आयोग को इस मामले में साफ बताना चाहिए कि बाहरी और अस्थाई कर्मचारियों से मतदाता सूची का काम करवाना, क्या चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खडे नहीं करते है? वर्मा ने कहा कि वनरक्षक जैसे कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र से दूर होते हैं, उनके लिए मतदान केंद्र क्षेत्रों में घर-घर सत्यापन करना व्यावहारिक रूप से असंभव है. वहीं मिड -डे मील व आंगनवाड़ी सहायिकाएँ नियमित सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, फिर भी उनको बीएलओ बनाना पूर्णतः गैरकानूनी है. मीटर रीडर और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी बीएलओ बनाए गए हैं. ऐसे लोगों की नियुक्ति आयोग के पात्रता मानकों का उल्लंघन है.

 

नियुक्तियों में नहीं रखी पारदर्शिता

वर्मा ने कहा कि अनेक जिलों में कलेक्टरों के आदेशों के बावजूद बीएलओ नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं रखी गई है. वहीं आधार कार्ड लिंकिंग को लेकर भी मतदाता सूची सत्यापन में ढिलाई बरती जा रही है एवं सर्वोच्च न्यायलय के आदेश के बाद भी आधारकार्ड को प्रामाणिक दस्तावजे मानने से इंकार किया जा रहा है. ‘निर्वाचन आयोग ने बिना तैयारी के ही एसआईआर थोप दिया है. कई जिलों में फॉर्म, दस्तावेज और सामग्री तक उपलब्ध नहीं हैं. ऐसा लगता है कि राजनीतिक दबाव में मतदाता सूचियों में मनमाफिक संशोधन किए जा सकें.

 

अयोग्य व अनुचित को हटाएं

कांग्रेस निर्वाचन आयोग से माँग करती है कि बीएलओ नियुक्तियों की तत्काल समीक्षा कर अयोग्य व अनुचित बीएलओ को हटाया जाए. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार आधार कार्ड लिंक अनिवार्य की जाए एवं उसे भी प्रामाणिक दस्तावेज मे शामिल किया जाए. वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि इन अनियमितताओं पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन कार्यालयों पर चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन करेगी.

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