मुंबई, 27 सितंबर (वार्ता)फिल्म ‘दिलजले’ को रिलीज हुए 30 साल पूरे हो गए हैं। एक्टर, प्रोड्यूसर और राइटर हरमन बावेजा के लिए यह फिल्म महज पुरानी याद नहीं, बल्कि उनके फिल्ममेकिंग सफर की शुरुआती सीखों से जुड़ी है। महज 15 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता और वेटरन फिल्ममेकर हैरी बावेजा के निर्देशन में बन रही इस फिल्म के सेट पर पहली बार करीब से फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को समझा था।’दिलजले’ के गाने ‘शाम है धुआं धुआं’ की शूटिंग के दौरान सेट पर सरोज खान कोरियोग्राफी, वीरू देवगन एक्शन और नायडू कैमरा संभाल रहे थे। सभी को अपने-अपने काम में व्यस्त देखकर हरमन ने अपने पिता से पूछा कि आखिर डायरेक्टर करता क्या है।
हरमन ने बताया कि लंच के दौरान उन्होंने अपने पिता से कहा, “मैं बहुत कन्फ्यूज हूं, आप सेट पर करते क्या हो?” उनके सवाल पर वहां मौजूद लोग हंसने लगे। उन्होंने कहा कि जब हर कोई अपना काम कर रहा है तो डायरेक्टर की भूमिका क्या है।
हैरी बावेजा ने उन्हें समझाया कि डायरेक्टर का काम ऑडियो-विजुअल माध्यम में कहानी को प्रभावी ढंग से कहना और अलग-अलग विभागों की प्रतिभा को एक विजन के तहत एक साथ लाना है। हरमन के अनुसार, उनके पिता ने बताया कि सभी एचओडी, तकनीशियन और क्रू अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिभाशाली होते हैं, लेकिन उन्हें एक ही कहानी और डायरेक्टर की विजन के अनुरूप काम करना होता है।
इसी फिल्म से जुड़ी एक और सीख हरमन को ‘शाम है धुआं धुआं’ की रिकॉर्डिंग के दौरान मिली। शुरुआती रिकॉर्डिंग से हैरी बावेजा और संगीतकार अनु मलिक पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे। दोनों ने गाने पर दोबारा काम किया और अपनी रचनात्मक सोच पर भरोसा रखा। आगे चलकर यह गाना ‘दिलजले’ के लोकप्रिय गीतों में शामिल हुआ।
हरमन के लिये यह अनुभव इस बात की सीख बना कि रचनात्मक फैसलों पर विश्वास रखना और अपनी कन्विक्शन के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।
आज तीन दशक बाद हरमन बावेजा अभिनय के साथ निर्माण और लेखन में भी सक्रिय हैं। ‘स्कूप’ के साथ अभिनय में वापसी के बाद वह बावेजा स्टूडियोज के मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने ‘मिसेज’ और ‘सिस्टम’ जैसी फिल्मों को को-राइट और प्रोड्यूस किया है। ‘हक’, ‘कप्तान’ और ‘भगवत चैप्टर वन: राक्षस’ समेत कई परियोजनाएं उनकी प्रोडक्शन स्लेट का हिस्सा हैं।
हरमन के लिये ‘दिलजले’ की 30वीं वर्षगांठ अपने पिता से मिली उन शुरुआती सीखों को याद करने का मौका है, जिनमें सही प्रतिभाओं को एक साथ लाना, अपनी रचनात्मक सोच पर भरोसा करना और किसी विचार को पर्दे तक पहुंचाना शामिल है।
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