टोक्यो। एशियन गेम्स में जब भारतीय खिलाड़ी पोडियम पर खड़े होकर तिरंगे को सलाम करते हैं, तो उसके पीछे सिर्फ उनकी मेहनत और संघर्ष नहीं, बल्कि कई ऐसे खेलों की मजबूत परंपरा भी है, जिन्होंने भारत को लगातार पदक दिलाए हैं। शूटिंग, एथलेटिक्स और कुश्ती जैसे खेल एशियन गेम्स में भारत के प्रमुख मेडल स्रोत रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग दौर में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के पदक अभियान को मजबूती दी है।
वहीं बॉक्सिंग, बैडमिंटन और हॉकी भी भारत की मेडल उम्मीदों में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत के खेल प्रदर्शन की तस्वीर तेजी से बदल रही है। आर्चरी, टेबल टेनिस, स्क्वैश और साइक्लिंग जैसे खेलों में भी भारतीय खिलाड़ी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। ऐसे में एशियन गेम्स में भारत की चुनौती अब सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पदक जीतने की नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा खेलों में अपनी पहचान बनाने की भी है। आखिर कौन से खेल भारत की ‘मेडल फैक्ट्री’ बन चुके हैं और किन नए खेलों से बढ़ रही हैं देश की उम्मीदें?
