
गरोठ। मंदसौर जिले की गरोठ तहसील के मौला खेड़ी बुजुर्ग गांव स्थित प्राचीन शंखोद्वार मेले का चार दिवसीय आयोजन कार्तिक पूर्णिमा पर सम्पन्न हुआ। दीपावली पश्चात लगने वाला यह राज्य स्तरीय मेला अकाल मृत्यु से मरे लोगों की आत्माओं की शांति और मोक्ष के लिए आयोजित किया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि अकाल मृत्यु को प्राप्त आत्माएं इस शंख द्वार से होकर यमलोक नहीं जातीं, बल्कि मोक्ष प्राप्त करती हैं। शिव पुराण और गरुड़ पुराण में वर्णित “अकाल मृत्यु के बाद तर्पण” की परंपरा का उद्गम स्थल भी यही माना जाता है।
चार दिन तक चलने वाले इस मेले में पिंडदान, नारायण बली, त्रिपिंडी श्राद्ध और ब्राह्मण भोज की विशेष धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई जाती हैं। चंबल नदी किनारे स्थित इस स्थल का प्रबंधन शंखोद्वार ट्रस्ट द्वारा किया जाता है, जबकि प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं सुविधाओं की व्यवस्था की जाती है।
ऐतिहासिक रूप से यह स्थल पूर्व में चंबल नदी तट पर स्थित था, जो गांधी सागर बांध निर्माण के दौरान जलमग्न हो गया। इसके बाद 1961 में इसे मौला खेड़ी बुजुर्ग में पुनर्स्थापित किया गया। आज यह मेला मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
