
जबलपुर। राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किये जाने पर हाईकोर्ट ने शहडोल कलेक्टर केदार सिंह पर दो लाख रूपये की कॉस्ट लगाई है। कलेक्टर को कॉस्ट की राशि व्यक्तिगत रूप से जमा करनी होगी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह की युगलपीठ ने कलेक्टर शहडोल के द्वारा गलत जानकारी पेश किये जाने को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही प्रारंभ करने के आदेश जारी किये है। युगलपीठ ने अवमानना कार्यवाही के संबंध में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 25 नवम्बर को निर्धारित की गयी है।
शहडोल निवासी कृषक हीरामनी वैश्य की तरफ से उसके बेटे सुषांत वैश्य पर कानूनी प्रक्रिया का पालन किये बिना एनएसए के तहत कार्यवाही की जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि एनएसए की कार्यवाही के संबंध में 9 सितम्बर 2024 को पारित आदेश में उनके बैटे के स्थान पर निरजकांत द्विवेदी का नाम था। पुलिस अधीक्षक शहडोल ने 6 सितम्बर 2024 को उनके बेटे के खिलाफ एनएसए की कार्यवाही करने के संबंध में कलेक्टर को प्रतिवेदन भेजा था। कलेक्टर ने 9 सितम्बर को रेत ठेकेदार के कर्मचारियों के बयान दर्ज करते हुए उसी दिन एनएसए का आदेश पारित कर दिया। किसी भी स्वतंत्र गवाह के बयान दर्ज नही किये गये। याचिका में कहा गया था कि उसके बेटे का विवाह फरवरी 2024 में हुआ था और उसके खिलाफ सितम्बर को एनएसए की कार्यवाही की गयी। मार्च में उसकी बेटी पैदा हुई परंतु उसका पिता जेल में निरूध्द था।
याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर शहडोल केदार सिंह व पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से तलब किया था। कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने पारित आदेश के अंतिम पृष्ठ में याचिकाकर्ता के पुत्र के बजाये नीरजकांत द्विवेदी के नाम का उल्लेख किये जाने की गलती स्वीकार की थी। तर्क दिया गया था कि नीरजकांत द्विवेदी और सुशांत बैस के मामलों की सुनवाईएक साथ की गई थी। इस तथ्यात्मक गलती के अलावा आदेश पारित करने में कोई अन्य त्रुटि नहीं है।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि एनएसए की कार्यवाही के संबंध में पारित आदेश को पुष्टि के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जाता है। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह विभाग ने भी अपने विवेक का उपयोग किये बिना कलेक्टर द्वारा पारित आदेश को मंजूरी प्रदान कर दी। आदेश को पढ़ने की जहमत तक नहीं उठाई गयी। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि जिला कलेक्टर के द्वारा एनएसए की कार्यवाही के अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजी गयी फाइल प्रस्तुत हाईकोर्ट में प्रस्तुत करें। कलेक्टर के द्वारा अनुमोदन के लिए फाइल अग्रेषित नहीं की गयी है तो राज्य को उनके खिलाफ कार्यवाही करना चाहिये। युगलपीठ ने इस संबंध में एसीएस गृह एसएस शुक्ला से हलफनामे में जवाब मांगा था।
अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह की तरफ से पेश किये गये हलफनामा में बताया गया था कि एनएसए के आदेश को अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजा गया था। टाइपिंग की गलती के कारण आदेश में याचिकाकर्ता के पुत्र के नाम के स्थान पर नीरजकांत द्विवेदी के नाम का उल्लेख किया गया है। इसके लिए क्लर्क को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता ब्रम्हेन्द्र पाठक ने बताया कि कलेक्टर केदारनाथ ने अपने हलफनामा में बताया था कि एनएसए की प्रकरण की सुनवाई के दौरान तीन व्यक्ति के बयान दर्ज किये गये थे। तीनों व्यक्ति के वही बयान थे जो उन्होने याचिकाकर्ता के पुत्र के खिलाफ साल 2022 में दर्ज अपराधिक प्रकरण में दिये थे। उक्त अपराधिक प्रकरण में लोक अदालत के माध्यम से समझौता हो गया है। एनएसए की कार्यवाही के लिए उसी प्रकरण को आधार बताया गया है। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि एनएसए का उपयोग टूल की तरह नहीं किया जा सकता है। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना आवष्यक है। एनएसए की कार्यवाही तभी की जाती है जब व्यक्ति से समाज व लोगों में भय की स्थिति उत्पन्न होती है। युगलपीठ ने कलेक्टर पर दो लाख रूपये की व्यक्तिगत कॉस्ट लगाते हुए उक्त राशि याचिकाकर्ता के पुत्र के खाते में जमा करने के आदेश जारी किये है। इसके अलावा मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि कलेक्टर तथा अतिरिक्त प्रमुख सचिव के खिलाफ एनएसए के आदेश का अवलोकन कर कार्यवाही करें। गलत हलफनामा पेश करने पर कलेक्टर के खिलाफ अवमानना कार्यवाही प्रारंभ करते हुए नोटिस जारी किये है।
