लखनऊ (वार्ता) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने गन्ने के बकाये पर बने ब्याज की रकम की भुगतान को लेकर विचाराधीन जनहित याचिका में मिल मालिकों को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। इस सम्बंध में मिल एसोसिएशन की ओर से दाखिल हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र को अदालत ने मंजूर कर लिया।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति राजीव भारती की खंडपीठ ने यह आदेश किसान मजदूर संगठन की ओर से वीएम सिंह की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में किसानों के गन्ने के बकाये पर बने ब्याज की रकम के भुगतान का मुद्दा उठाया गया है।
मिल एसोसिएशन की ओर से दलील दी गई कि वे इस मुकदमे में आवश्यक पक्षकार हैं, क्योंकि, यदि याचिका सफल होती है तो ब्याज के भुगतान की जिम्मेदारी उन्हीं पर होगी। हालांकि, अर्जी का याची की ओर से विरोध किया गया। इसपर, कोर्ट ने कहा कि मामले में वित्तीय जिम्मेदारी आखिरकार मिल मालिकों की ही होगी लिहाजा, यह हस्तक्षेप अर्जी मंजूर किए जाने योग्य है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवायी 24 नवंबर को नियत की है।
