इंदौर: जय आदिवासी संगठन (जयस) द्वारा खरगोन में एक आरक्षक और इंस्पेक्टर के बीच हुए विवाद को लेकर बार-बार याचिका लगाना भारी पड़ गया. कोर्ट ने इस जनहित याचिका को निजी उद्देश्य से प्रेरित मानते हुए न केवल नाराजगी जताई, बल्कि जयस पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया. कोर्ट ने कहा कि कोर्ट को क्या तमाशा समझ रखा है. दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
जयस के खरगोन जिला अध्यक्ष सचिन सिसोदिया की तरफ से हाई कोर्ट में लगाई गई इस याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया. शासन की तरफ से इस याचिका पर एडिशनल एडवोकेट जनरल अरनंद सोनी ने तर्क प्रस्तुत किए थे. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पहले भी याचिकाएं लगी थीं, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया गया. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित याचिका तभी स्वीकार की जा सकती है, जब उसमें वास्तविक सार्वजनिक हित व जनप्रभाव हो. जनहित याचिका का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
यह था मामला
खरगोन में रिजर्व इंस्पेक्टर सौरभ सिंह कुशवाह और आरक्षक राहुल चौहान के बीच 23 अगस्त को विवाद हो गया था. इस मामले को जयस ने उठाया और धरना प्रदर्शन भी किए. इंस्पेक्टर व उनकी पत्नी पर एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज करने की मांग भी की गई. बाद में कोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई. कोर्ट ने कहा कि पीड़ित सरकारी कर्मचारी है और शिक्षित भी है. वह खुद अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए सक्षम है. इसके बाद याचिका वापस ले ली गई. बाद में सचिन चौहान ने याचिका लगाई, जिसे स्वीकार कर लिया गया, लेकिन बाद में उन्होंने कोर्ट में मौजूद होकर कहा कि वह याचिका वापस लेना चाहता है. इसके बाद जयस के जिलाध्यक्ष सचिन सिसोदिया ने याचिका लगा दी. इस पर कोर्ट नाराज हो गया और जुर्माना ठोक दिया.
