
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि हुक्के में किसी भी तरह की प्रतिबंधित सामग्री या तंबाकू का उपयोग नहीं किया जा रहा है, तो जिला प्रशासन उसके संचालन पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता। मामला जबलपुर की एक निजी होटल की ओर से दायर याचिका से संबंधित था। होटल प्रबंधन ने हर्बल और फ्लेवर्ड हुक्का चलाने की अनुमति के लिए कोर्ट की शरण ली थी। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि सार्वजनिक स्थानों पर केवल उन्हीं हुक्कों पर प्रतिबंध लागू होता है जिनमें तंबाकू या अन्य नशीले पदार्थों का इस्तेमाल होता है। चूंकि उनके होटल में केवल हर्बल हुक्के का उपयोग किया जाएगा, इसलिए यह कानून के दायरे में आता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रशासन को समय-समय पर निरीक्षण करने की स्वतंत्रता रहेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हुक्के में तंबाकू युक्त प्रतिबंधित सामग्री का उपयोग तो नहीं हो रहा।
