इंदौर:जब मजदूरी करने के लिए दूसरे शहर से लोग यहां आकर बसने लगे तो मौजूदा शासन ने उन्हें पट्टे के प्लॉट दिए, ताकि वह यहां रहकर अपना गुजर-बसर कर सकें. शहर में आज भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पट्टे की बस्ती बसी हुई हैं, लेकिन इन गरीब रहवासियों को यहां से हटाए जाने का डर हमेशा सताता रहता है. सुरक्षित भविष्य को देखते हुए वे हमेशा सरकार से अपेक्षा करते हैं उन्हें स्थाई रूप से बसा दिया जाए.
इसी तरह के डर के साये में जीने को मजबूर हैं हवा बंगला क्षेत्र में शहर की सीमा में बसे अहीरखेड़ी के रहवासी. यहां करीब 30 वर्ष पूर्व पट्टे की जमीन पर गरीब और मजबूर वर्ग के लोगों ने जैसे-तैसे अपने आशियाने बना लिए थे. यह बस्ती करीब आठ वर्ष पहले ही नगर निगम सीमा में आई, जो कि वार्ड -79 के अंतर्गत आती है. अहीरखेड़ी की इस बस्ती में कुछ के पास सरकारी पट्टे हैं तो कुछ के पास तो कोई कागज भी नहीं है, ताकि उन्हें दूसरा विकल्प मिल सके.
पूर्व में पंचायत और वर्तमान में नगर निगम व विधानसभा चुनाव के दौरान बस्ती के रहवासियों ने अपने स्थाई पट्टों की मांग की, लेकिन हमेशा उन्हें सिर्फ आश्वासन ही दिया गया और चुनाव के बाद इस पर कोई चर्चा भी करने को तैयार नहीं है. दूसरी ओर, शासन द्वारा सरकारी जमीने कब्जा मुक्त करवाने की आए दिन समाचारों के माध्यम से मिलने वाली जानकारी से अहीरखेड़ी बस्ती के लोगों को अपने भविष्य की चिंता सता रही है.
यह बोले रहवासी
अहीरखेड़ी में 30 वर्ष पुरानी बसाहट है. यहां कुछ लोगों के पास पट्टे हैं तो कुछ के पास नहीं, नेताओं और अधिकारियों से कहने जाओ तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं देता. हम आज भी अधर में लटके हैं.
– पार्वती बाई
जिन लोगों के पास पट्टे हैं, उन्हें भी हटा देते हैं, लेकिन जिनके पास नहीं हैं वो तो और भी खतरे में हैं. सरकार को हम गरीब मजदूरों के सुरक्षित भविष्य के लिए गंभीरता से कुछ करना चाहिए.
– भूरी रायकवार
हम गरीबी रेखा से भी नीचे जीवन जी रही हंै, भविष्य में हमें यहां से हटा दिया गया तो हम कहां जाएंगे, सरकार हमें स्थाई पट्टे दे, ताकि हमारे बच्चे कभी दर-दर भटकें नहीं.
– झिंगली बा
