बनखेड़ी:नगर में लंबे समय से अंडरब्रिज निर्माण की मांग उठती रही है, मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। गौरतलब है कि पिछले 3 वर्षों से स्टेट हाइवे 220पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। गुरुवार को रेलवे द्वारा इस क्रॉसिंग को मार्च 2026 तक बंद कर देने का आदेश जारी कर दिया , जबकि यह मार्ग शहर का इकलौता प्रमुख विकल्प था।
गेट बंद होने के बाद भारी वाहनों के लिए अब केवल एक ही वैकल्पिक मार्ग बचता है—ओल नदी पुल के नीचे से होकर गुजरने वाला कच्चा रास्ता। यह मार्ग न तो अधिकृत है और न ही भारी वाहनों के लिए सुरक्षित। संकीर्ण एवं जोखिम भरे इस रास्ते से भारी वाहनों का निकलना किसी बड़ी दुर्घटना को दावत देने जैसा है। इसके अलावा इस मार्ग पर उड़ने वाली अत्यधिक धूल से आम जन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी रास्ते से आगे मंडी प्रांगण तक जाने वाला एक विकल्प था, परंतु मंडी परिसर में किसानों द्वारा धान रखे जाने से वह मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।यह बड़ा सवाल खड़ा होता है कि रेलवे ने बिना वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किए इतने लंबे समय के लिए गेट बंद करने का फैसला कैसे ले लिया। क्या गेट बंद करने से पहले किसी प्रकार का जमीनी सर्वे किया गया था? स्थानीय प्रशासन एवं नगर परिषद की ओर से भी फिलहाल कोई ठोस व्यवस्था नज़र नहीं आ रही है।शहर के भीतर हॉस्पिटल रोड चौराहे की पुलिया पहले से ही जर्जर हाल में है और किसी भी क्षण दुर्घटना का कारण बन सकती है। वहीं इस पुलिया से कुछ ही दूरी पर बनाई गई नई सीवरेज लाइन भारी वाहनों के दबाव से टूट चुकी है।
दूसरी ओर रामदेव शुगर मिल के सामने से राहतवाड़ा–चौकी बाला रोड तक जाने वाला रास्ता इतना संकरा है कि दो वाहन साथ-साथ नहीं निकल सकते। सड़क के दोनों ओर शोल्डर भी नहीं है, जिससे दुर्घटना का जोखिम और बढ़ जाता है।
तहसीलदार अंजू लोधी ने बताया—
“बनखेड़ी के अंदर से केवल हल्के वाहन ही निकलेंगे। बड़े वाहनों को उमरधा होते हुए पिपरिया भेजा जाएगा। नगर के भीतर सिर्फ दोपहिया और हल्के चारपहिया वाहन ही अनुमति के साथ चल पाएंगे।”
