उज्जैन: आगामी सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए उज्जैन को एक स्थायी और अत्याधुनिक ‘कुंभ नगरी’ के रूप में विकसित करने की दिशा में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लैंड पूलिंग योजना को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. प्राधिकरण ने एक प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है जो किसानों को योजना का लाभ बताने के लिए घर-घर पहुंचेगा.
आमजन में उहापोह दौर भी चल रहा है कि लैंड पूलिंग योजना इतने कम समय में बन पाएगी या नहीं इस उधेड़बीन के बीच यूडीए ने एक संवाद दल बनाकर बड़ी पहल की है, इससे स्पष्ट संदेश है कि प्राधिकरण योजना को लेकर गंभीर है. इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य हर 12 साल में होने वाले मेले के लिए बार-बार अस्थायी ढांचे बनाने की पुरानी परिपाटी को समाप्त कर, एक स्थायी और विश्व स्तरीय धार्मिक-आध्यात्मिक शहर की नींव रखना है.
किसानों की 50′ जमीन पर होगा स्थायी निर्माण
विकास प्राधिकरण की यह योजना किसानों की भूमि के उपयोग पर आधारित है. योजना के तहत, किसानों की 50′ जमीन ली जाएगी जिस पर सिंहस्थ से संबंधित स्थाई निर्माण किए जाएंगे. इस अधिग्रहित भूमि का बड़ा हिस्सा धार्मिक गतिविधियों के संचालन के लिए उपयोग होगा.
घर-घर जाकर किसानों को समझाएगा विशेष दल
योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए, उज्जैन विकास प्राधिकरण ने एक विशेष प्रतिनिधि मंडल का गठन किया है. इस दल में पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और यूडीए के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं. यह दल लगातार प्रक्रिया के विभिन्न चरणों को पूरा करते हुए, घर-घर जाकर किसानों को लैंड पूलिंग योजना के लाभ विस्तार से बताएगा और उनके सभी संदेहों को दूर करेगा. प्राधिकरण का मानना है कि किसानों के सहयोग से ही उज्जैन देश की पहली वर्ल्ड क्लास स्पिरिचुअल सिटी बन पाएगा.
