
भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपने शताब्दी वर्ष में संगठन शक्ति और सामाजिक जागरण का प्रभावशाली संदेश भोपाल में दिया। रविवार को राजधानी के विभिन्न जिलों और बस्तियों में कुल 76 स्थानों पर भव्य पथ संचलन निकाले गए, जिनमें हजारों स्वयंसेवकों के साथ समाज के प्रबुद्ध नागरिक और मातृशक्ति भी शामिल हुईं।
इन आयोजनों ने न केवल अनुशासन और एकता का प्रदर्शन किया, बल्कि पंच परिवर्तन नागरिक शिष्टाचार, सामाजिक समरसता, कुटुम्ब प्रबोधन, स्व का बोध और पर्यावरण संरक्षण जैसे विचारों के माध्यम से समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आह्वान भी किया।
संगठन और समाज सुधार का संगम
विद्युत जिले से लेकर विक्रम, प्रताप, तात्या टोपे और भोजपुर जिलों तक निकले पथ संचलनों में स्वयंसेवकों ने एकजुट होकर राष्ट्रनिष्ठा, अनुशासन और संस्कार का उदाहरण प्रस्तुत किया।
साकेत नगर में प्रांत संघचालक अशोक पांडेय ने वीर शिवाजी महाराज के पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास सिखाता है,जब समाज संगठित होता है, तब परिवर्तन अवश्य होता है।
उन्होंने पंच परिवर्तन को आधुनिक भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का आधार बताया।
संघ की यात्रा से शताब्दी संकल्प तक
अवध नगर, तात्या टोपे जिला और भोजपुर के आयोजनों में वक्ताओं ने संघ की स्थापना से लेकर शताब्दी यात्रा तक की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया।
विभाग संघचालक सोमकांत उमालकर ने डॉ. हेडगेवार के जीवन से प्रेरणा लेते हुए कहा कि संघ की शाखा समाज में अनुशासन और आत्मगौरव का संस्कार देती है।
वहीं प्रांत सह संपर्क प्रमुख गिरीश जोशी ने पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में समरसता और परिवारिक एकता को आवश्यक बताया।
तात्या टोपे जिले के अंबेडकर नगर में भरतनाट्यम नृत्यांगना डॉ. लता सिंह मुंशी और विद्या भारती के दीपक चंदेवा ने मातृशक्ति की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्रनिर्माण की शक्ति समाज के प्रत्येक परिवार में निहित है।
संस्कृति और सृजनशीलता का संगम
भोजपुर जिले के नीलबड़ मंडल में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार वेकंट रमण सिंह श्याम की उपस्थिति ने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा दी।
प्रांत सद्भावना सह प्रमुख निमिष सेठ ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि यह यात्रा सेवा, संगठन और संस्कार का अद्भुत संगम है।
संघटन से समरस समाज की दिशा
प्रताप जिले के टीलारामपुरा और गणेशपुरा बस्तियों में हुए पथ संचलनों में सामाजिक समरसता और सेवा की भावना को बल मिला।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि संघ का उद्देश्य केवल संगठन निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्र जीवन में एकात्मता और आत्मविकास का वातावरण निर्मित करना है।
