
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने असम के गुवाहाटी में आयोजित इंटरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटी इन मध्यप्रदेश में भाग लेते हुए कहा कि असम और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में अपार संभावनाएं हैं और दोनों मिलकर विकास की नई कहानी लिख सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि असम एक मात्र राज्य है जो पत्ते को भी सोना बनाकर बेचता है। यहां के लोग हर आठ दिन बाद पत्ते निकालकर असम टी के नाम से विश्वभर में व्यापार करते हैं।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में नॉर्थ ईस्ट भारत का वह गौरवशाली दरवाजा है जो दुनिया से हमें परिचित कराता है।”
उन्होंने कहा कि असम पहले पिछड़ा माना जाता था, लेकिन अब जिस गति से असम और उसके पड़ोसी राज्य प्रगति कर रहे हैं, वह देश के लिए प्रेरणादायक है। मध्यप्रदेश और असम दोनों राज्यों में पर्यटन से लेकर औद्योगिक विकास तक कई समानताएं हैं।
डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्याप्त लैंड बैंक, सरप्लस बिजली और पानी की उपलब्धता है, जिससे निवेशकों को हर तरह की सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा, आपका गैंडा और हमारा टाइगर दोनों साथ दौड़ सकते हैं। दोनों राज्यों को पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मिलकर काम करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने वन्यजीव पुनर्बसाहट का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे असम में जंगली भैंसा है, वैसे ही मध्यप्रदेश में गौर पाया जाता है। हम आपके जंगलों को गौर दे सकते हैं और आपकी ब्रह्मपुत्र के लिए घड़ियाल और मगर प्रदान कर सकते हैं, जैसे हम गैंडा भी अपने यहां ला सकते हैं।
उन्होंने बताया कि एशिया में पहली बार चीतों की सफल पुनर्बसाहट भारत के मध्यप्रदेश में हुई है, जो पूरे विश्व के लिए उदाहरण है।
डॉ. यादव ने आगे कहा कि मध्यप्रदेश ऊर्जा और माइनिंग सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दिल्ली की मेट्रो भी मध्यप्रदेश की बिजली से चल रही है, यह हमारे लिए गर्व की बात है। हमारे पास पानी के ऊपर और नीचे दोनों जगह से बिजली उत्पादन की क्षमता है।
मुख्यमंत्री ने निवेशकों को आकर्षित करते हुए कहा कि यदि आप मध्यप्रदेश में रोजगार आधारित उद्योग स्थापित करते हैं, तो हम बिजली, पानी और सड़क के साथ प्रति श्रमिक 5000 तक का इंसेंटिव 10 वर्षों तक देंगे।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश और असम मिलकर वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन, ऊर्जा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भारत के लिए एक नई मिसाल पेश कर सकते हैं।
