
खंडवा। पंधाना क्षेत्र के अरदला गांव में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में 11 लोगों की मौत ने पूरे प्रशासनिक सिस्टम को झकझोर दिया है। हादसे के बाद जब कलेक्टर और जिला प्रशासन ने गांव में राहत और पुनर्वास की समीक्षा शुरू की, तो जांच के दौरान गांव की स्थिति ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर कर दिए। न केवल बुनियादी सुविधाओं का अभाव सामने आया, बल्कि यह भी पता चला कि कई ग्रामीण वर्षों से सरकारी योजनाओं से वंचित हैं और रिकॉर्डों में गंभीर गड़बड़ियां दर्ज हैं।
गांव के रिकॉर्डों में गड़बड़ी, कर्मचारी बेपरवाह:
कलेक्टर की टीम ने जब ग्रामीणों के दस्तावेजों और योजनाओं के रजिस्ट्रेशन की जांच की, तो कई परिवारों के नाम रिकॉर्ड में ही नहीं मिले। पात्र होने के बावजूद कई लोगों को आवास, राशन कार्ड और पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। जांच में पाया गया कि स्थानीय स्तर के कर्मचारी नियमित सर्वे या अपडेट का काम नहीं कर रहे थे, जिससे योजनाओं की वास्तविक स्थिति छिपी रही।
सरकारी योजनाओं से कटे ग्रामीण, शिकायतें अनसुनी:
गांव के आदिवासी बहुल इलाकों में लंबे समय से शिकायतें की जा रही थीं कि योजनाओं का लाभ केवल कागजों में सीमित है। लेकिन हादसे के बाद जब प्रशासन ने फील्ड जांच की, तब जाकर असली तस्वीर सामने आई जहां सरकारी योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित रह गईं और जरूरतमंद अब भी उपेक्षित हैं।
प्रशासनिक सुधार की तैयारी, कार्रवाई के संकेत:
कलेक्टर ने खामियों को गंभीरता से लेते हुए लापरवाह कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं। अब उन पर कार्रवाई की संभावना है जिन्होंने वर्षों से रिकॉर्ड अपडेट नहीं किए।
ग्रामीणों की मांग: अब सिर्फ जांच नहीं, स्थायी सुधार चाहिए
ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा केवल एक त्रासदी नहीं, बल्कि दशकों की प्रशासनिक उपेक्षा का परिणाम है। उनका कहना है कि अब केवल सड़क या मुआवजा नहीं, बल्कि ऐसा ठोस सुधार चाहिए जिससे भविष्य में कोई और गांव इस तरह की लापरवाही का शिकार न बने।
