गंज से लेकर बाल विहार मैदान तक बदलता रहा है दशहरा उत्सव का स्वरूप

सीहोर। असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक पर्व विजयादशमी शहर में वर्षों से उल्लास और आस्था के साथ मनाया जा रहा है. गंज में रावण दहन की शुरुआत वर्ष 1985 में रानी मोहल्ला निवासी महेश रायकवार और उनके साथियों ने की थी.शुरुआत में हाथठेले से लाए गए रावण को दशहरा मैदान (वर्तमान राठौर पार्क) पर दहन किया गया, जो धीरे-धीरे विराट रूप लेता गया. समय के साथ यह आयोजन इतना लोकप्रिय हुआ कि मंच पर उपस्थिति के लिए जनप्रतिनिधियों में होड़ लगने लगी.

रावण निर्माण में समाधिया मंदिर रोड निवासी स्व. गणेश ओझा और स्व. महेश रायकवार की अहम भूमिका रही. उनकी टीम हर साल पुतले में बदलाव करती, जैसे घूमती गर्दन और तलवार थामे हाथ का ऊपर-नीचे होना दर्शकों को रोमांचित करता था. आतिशबाजी और भव्य राम बारात इस उत्सव की शान होती थी. वर्ष 2000 तक गंज में आयोजन हुआ, बाद में जगह की कमी और पार्क निर्माण के चलते स्थल बदलकर सुभाष स्कूल मैदान किया गया.

वर्तमान में गंज के समीप फिर से रावण दहन होने लगा है, हालांकि अब अधिकांश समितियां भोपाल से रेडीमेड रावण मंगवाती हैं. शहर में गंज के अलावा नदी चौराहा, बाल विहार मैदान और कस्बा क्षेत्र में भी रावण दहन होता है. इस बार महेश रायकवार के पुत्र विजय रायकवार ने रानी मोहल्ले में 21 फीट ऊंचे रावण का निर्माण किया है.

उधर, छावनी दशहरा उत्सव समिति द्वारा बाल विहार मैदान पर रावण दहन से पहले भव्य चल समारोह निकाला जाएगा. शाम सात बजे नमक चौराहे से शुरू होकर राम बारात रावण दहन स्थल पहुंचेगी. इस अवसर पर भोपाल से 71 फीट के रावण के साथ मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले लाए गए हैं, जिनके दहन से पहले आतिशबाजी के साथ भगवान राम और रावण का युद्ध मंचित किया जाएगा.

 

 

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