
ब्यावरा। गौवंश में फैलने वाले लम्पी रोग ने एक बार फिर जिले में अपनी दस्तक दे दी है. टीकाकरण के बावजूद दिन ब दिन गौवंश में लम्पी रोग फैलता ही जा रहा है, आश्चर्यजनक बात यह है कि संक्रमण वाले इस रोग से ग्रसित गौवंश को अन्य गौवंश के बीच देखा जा सकता है. इन सब बातों से विभाग मानों अनभिज्ञ है.
पशु चिकित्सा विभाग का कहना है कि गौवंश में लम्पी रोग न हो इसके मद्देनजर पूर्व में टीकाकरण किया गया. परन्तु इसके बाद भी नगर सहित जिले में लम्पी पीडि़त गौवंश सामने आ रहे है.
नगर में लम्पी पीडि़त गौवंश
नगर में भी लम्पी पीडि़त गौवंश की संख्या बढ़ रही है. बुधवार को प्रात: 9.46 बजे स्थानीय राजगढ़ रोड स्थित पंचशील कॉलोनी में एक लम्पी से पीडि़त गौवंश अन्य गौवंश के बीच बैठे हुए नजर आया. फिलहाल विभाग के पास लम्पी पीडि़त गौवंश के संबंध में कोई जानकारी नहीं है. लम्पी वायरस पर काबू पाने के लिए टीकाकरण, प्रभावित मवेशियों को अलग रखना आदि सुरक्षात्मक उपाय जरुरी है.
एक दूसरे से फैलता रोग
जानकारों के अनुसार मवेशी में होने वाला लम्पी रोग संक्रमण वाला है जो कि एक मवेशी से दूसरे मवेशी में फैलता है. इसमें प्रभावित मवेशी को अलग रखा जाये, संक्रमित मवेशी को स्वस्थ मवेशियों से अलग रखा जाये ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके. किंतु वर्तमान में जो भी लम्पी प्रभावित मवेशी है वह अन्य मवेशियों के साथ झुंड में ही रह रहे है.
सुरक्षात्मक बाते
लम्पी मवेशियों का ही रोग है जो कि एक मवेशी से दूसरे मवेशी में जा पहुंचता है. हालांकि लम्पी वायरस इंसानों में नहीं फैलता है. सावधारी बरतते हुए दूध का उपयोग करने से पहले उसे अच्छी तरह उबालना चाहिए. पशुपालक बाहर से खरीदे जा रहे नए पशुओं के स्वास्थ्य की जांच करवाए. यदि किसी मवेशी में लम्पी रोग के लक्षण नजर आये तो तुरंत इसकी जानकारी पशु चिकित्सा विभाग को दी जाये.
हजारों मवेशी सडक़ों पर
मवेशियो को पूरी तरह से संरक्षण एवं उनकी देखभाल करने हेतु बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखे जाने के सख्त निर्देश दिए गये थे फिर भी आज भी हजारों की संख्या में मवेशी सडक़, चौराहो, हाईवे पर देखे जा सकतेे है.
विगत दिवस जिला मुख्यालय पर सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक में सडक़ो पर विचरण करने वाले बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित करने के निर्देश दिए गये थे तथा कहा गया कि हाईवे पर मवेशियों को सुरक्षित करने के लिए सतत् देखरेख की जाये. अन्य मार्गो पर भी मनरेगा से कर्मचारी तैनात कर मवेशियों को सुरक्षित किया जाये ताकि सडक़, हाईवे, चौराहों पर विचरण करने वाले मवेशी सडक़ दुर्घटना का कारण न बने.
जिले में नाममात्र गौशालाऐ
जानकारी के अनुसार जिले भर में मात्र 140 गौशालाएं संचालित है. इनमें पांच गौशाला के पंजीयन हाल ही में हुए है. 111 गौशालाएं शासकीय तथा 29 गौशालाएं अशासकीय है. प्रत्येक गौशाला में गौवंश के रहने की क्षमता लगभग 100 के आसपास है. इस तरह 14 हजार के आसपास ही गौवंश गौशालाओं में रह रहा है. जबकि जिले में बेसहारा गौवंश की संख्या पशु चिकित्सा विभाग के अनुसार 65 हजार से अधिक है. यह गौवंश सडक़ो, चौराहों, हाईवे एवं गली मोहल्लों में खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है.
यदि किसी मवेशी में लम्पी रोग के लक्षण है तो वह टीम द्वारा दिखवा रहे है. ऐसे मवेशियों को अन्य मवेशियों से अलग रखा जाये.
एम.एस. कुशवाह
जिला उप संचालक
पशु चिकित्सा विभाग राजगढ़
