नयी दिल्ली, 24 सितंबर (वार्ता) अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने बुधवार को राष्ट्र निर्माण के प्रति समूह की प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि हिंडनबर्ग आरोपों के मामलों में सेबी के फैसलों ने समूह की पारदर्शिता और संचालन के तौर-तरीकों पर मुहर लगा दी है।
भारतीय पूंजी बाजार नियामक सेबी ने पिछले सप्ताह दो अलग-अलग फैसलों में अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग के जनवरी 2023 में लगाये गये आरोपों को गलत बताते हुए अडानी समूह की कंपनियों को क्लीनचिट दे दी थी।
श्री अडानी ने शेयरधारकों को आज एक पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट सिर्फ अडानी समूह की आलोचना से परे, भारतीय उद्यमों के वैश्विक स्तर पर खुद को स्थापित करने के सपनों को चुनौती दी गयी थी। समूह के लिए यह एक परीक्षा की शुरुआत थी जिसने “हमारे संचालन के तौर-तरीकों, हमारे उद्देश्य और इस सोच को चुनौती दी कि भारतीय कंपनियां वैश्विक स्तर पर सबसे आगे हो सकती हैं”।
उन्होंने कहा कि सेबी के अंतिम फैसलों से सत्य की जीत हुई है। जिसका उद्देश्य समूह को कमजोर बनाना था उसी ने समूह की जड़ों को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने कहा, “यह एक नियामकीय क्लीनचिट से कहीं अधिक है, यह पारदर्शिता, संचालन के तौर-तरीकों और जिन उद्देश्यों के लिए कंपनी ने हमेशा काम किया है, उसे मिली मान्यता है।”
अडानी समूह के अध्यक्ष ने कहा कि समूह की ताकत शब्दों में नहीं उसके प्रदर्शन में झलकती है। वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान समूह का परिचालन लाभ 57,205 करोड़ रुपये से बढ़कर 89,806 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जो सालाना 25 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर्शाता है। दो साल में परिसंपत्तियां 48 प्रतिशत बढ़कर 6,09,133 करोड़ रुपये हो गया। समूह ने पिछले दो साल में वझिंजम में देश के पहले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट का संचालन शुरू किया, छह गीगा वाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी, दुनिया के सबसे बड़े तांबा स्मेल्टर परिसर का संचालन शुरू किया और सात हजार किलोमीटर बिजली पारेषण लाइन बिछाई।
श्री अडानी ने कहा कि समूह भविष्य में परिचालन मानकों को और मजबूत करेगा और राष्ट्र निर्माण के लिए दोगुनी गति से काम करते हुए अवसंरचना में निवेश जारी रखेगा।
उन्होंने पत्र के अंत में सोहन लाल द्विवेदी की एक कविता की पंक्तियां लिखी हैं: लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

