झाड़फूंक कराती रही महिला और शरीर में फैला रेबीज

छिंदवाड़ा। आदिवासी अंचलों में आज भी अंधविष्वास फैला हुआ है। बीमारी, सांप डसने के मामले हो कुत्ते काटने के मामले ग्रामीण इलाज कराने की बजाए झाड़ फूंक पर ज्यादा विश्वास करते है। इसी तरह का एक और मामला आया है। जहां एक महिला को कुत्ते काटने के बाद इलाज कराने की बजाए झाडफ़ूंक करवाई। जिससे कुछ महीनों उसके शरीर में रैबिज फैल गया। वह गांव में लोगों को कुत्तों की तरह काटने दौडऩे लगी। इससे पूरे गांव में डर का वातावरण पैदा हो गया है। लोग घरों के बाहर निकलने में कतरा रहे है। मामला तामिया के अतरिया ग्राम टिपाखेड़ा का है।

महिला के परिजन पूरन उइके निवासी टीपाखेड़ा ने बताया कि उनकी सास जगवती 50 साल को जनवरी महीने में कुत्ते ने काट लिया था। उस समय परिवार ने अस्पताल में इलाज कराने के बजाय गांव में झाड़-फूंक करवा ली। शुरुआती दिनों में महिला सामान्य रही, लेकिन कुछ समय बाद उसकी हालत बिगडऩे लगी। महिला में अजीब लक्षण दिखने लगे वह पानी देखकर डरने लगी और उससे दूर भागती थी। इसके साथ ही उसका व्यवहार कुत्तों जैसा हो गया। स्थिति तब गंभीर हो गई जब वह आसपास के लोगों को काटने के लिए दौडऩे लगी। घबराए परिजन उसे तत्काल उसे तामिया के शासकीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक इलाज के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। महिला का इलाज जारी है, उसकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।

पानी देखकर डर रही महिला

बताया जा रहा है कि रैबिज फैलने के बाद वह लोगों को काटने दौडऩे लगी। उसकी हरकत अजीबों गरीब हो गई। उसके शरीर में रैबिज फैलने के बाद पानी से डर रही है। पानी देखकर वह दूर भागती है। लोग उससे बचने के लिए पानी का सहारा लेने लगे थे। आखिरकार उसके परिजनों ने जैसे तैसे पकड़कर उसे अस्पताल पहुंचाया।

डॉक्टरों ने की अपील ००००

डॉक्टर दिनेश पलास ने बताया कि कुत्ते के काटने के मामलों को कभी भी लापरवाही नहीं वरतना चाहिए। समय पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन और उचित इलाज करवाना बेहद जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। आवारा कुत्ते के काटने के बाद तत्काल घाव को पानी और साबुन से धोना चाहिए। बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में जाकर टीकाकरण कराना चाहिए। झाड़-फूंक या घरेलू उपायों पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।

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