सीहोर। ग्राम छतरपुर में जारी सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन जगद्गुरु पंडित अजय पुरोहित ने भगवान विष्णु के 24 अवतारों के बारे में विस्तृत रूप से बताया.
उन्होंने परिक्षित और सुखदेव के बारें में बताते हुए कहा कि कलयुग आगमन के समय पांडव के वंशज परीक्षित को सुखदेव ने भागवत सुनाई थी. इसके बाद ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई. यहां से मोक्ष की प्राप्ति के लिए भागवत सुनाने का प्रचलन शुरू हुआ. मंगलवार को भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों जैसे वामन, और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का वर्णन करते हुए कहा कि जब धर्म की हानि होती है तो ईश्वर अवतार लेकर पृथ्वी को पापियों से मुक्त कराकर धर्म की स्थापना करते हैं.
जगद्गुरु ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था. जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं. जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा. भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए. भगवान श्रीकृष्ण गोकुल में नित्य ही माखन चोरी लीला करते हैं. मां यशोदा के बार-बार समझाने पर भी श्रीकृष्ण नहीं मानते हैं तो मां यशोदा ने भगवान को रस्सी से बांधना चाहा पर भगवान को कौन बांध सकता है, लेकिन मां की दशा को देखते हुए स्वयं बंध जाते हैं. इसलिए भगवान को न धन, पद व प्रतिष्ठा से नहीं बांध सकता. भगवान तो प्रेम से बंध जाते हैं.
