सीहोर।आंकड़ों के लिहाज से भले ही बारिश कम हुई हो, लेकिन इसने जिले की लगभग सभी सड़कों की सूरत बिगाड़ दी है. ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें हों या फिर स्टेट या नेशनल हाईवे. सड़कों के गड्ढे रोजाना हादसों को जन्म दे रहे हैं. जिम्मेदारों द्वारा पेचवर्क नहीं करने के कारण स्थित और भी दयनीय हो गई है.
जिले की सड़कों पर एक बार फिर गड्ढों का साम्राज्य स्थापित हो गया है. हाल ही में बनी सड़कें हों या फिर कुछ साल पहले इनका निर्माण हुआ हो. बारिश के मौसम में इन सड़कों पर गड्ढों की भरमार हो गई है. ऐसे में सड़क हादसे हो रहे हैं. लोग असमय काल के गाल में समा रहे हैं. एक दिन पहले ही सोमवार को श्यामपुर मार्ग पर एक सेवानिवृत्त शिक्षक की सड़क हादसे में मौत हो गई. बताया जाता है कि अज्ञात वाहन चालक गड्डों से बचने के प्रयास में गलत दिशा में आ गया और सामने से आ रहे रिटायर्ड शिक्षक की बाइक में टक्कर मार दी. जिससे उनका दुखद प्राणांत हो गया था.
हैरत की बात यह है कि इस मार्ग को अत्याधुनिक एफडीआर तकनीक से बनाया गया था. करोड़ों रुपए की लागत से बनी सड़क के बारे में दावा किया गया था कि दस साल तक इसका कुछ भी नहीं बिगड़ेगा, लेकिन सड़क एक साल भी दम नहीं टेक सकी.
संबंधित विभाग द्वारा पेचवर्क भी किए गए, लेकिन उनका हश्र भी सड़क की तरह हुआ. घटिया मटेरियल ज्यादा टिक नहीं सका और अब हालात यह हैं कि सीहोर से श्यामपुर तक इस मार्ग पर सफर करना कष्टदायी के अलावा हादसों का कारण बन रहा है. यह स्थिति केवल श्यामपुर मार्ग की नहीं है. अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी जर्जर और खस्ताहाल सड़कों के कारण लोग परेशान हैं. बारिश में इन सड़कों के गड्डों में भरा पानी वाहन चालकों को घायल करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है.
