उज्जैन: भगवान मंगलनाथ का शिखर श्रद्धालुओं की आस्था से फिर निखर रहा है. भक्तों द्वारा वर्षों से अर्पित दान और चढ़ावे की राशि आज अपने ही मंदिर के निर्माण में उपयोग हो रही है. मानो भगवान स्वयं अपने भक्तों की भक्ति से प्राप्त अर्पण को आशीर्वाद रूप में लौटा रहे हों, अपने तीर्थ, अपने धाम और अपने शिखर को और भव्य बनाने के लिए उक्त दान राशि का उपयोग हो रहा है. यह निर्माण केवल पत्थरों का नहीं, बल्कि श्रद्धा, आस्था और विश्वास का प्रतिरूप बन रहा है, जहाँ दान की हर राशि ईंट की तरह जुड़कर धार्मिक वैभव का नया स्वर्णिम अध्याय लिख रही है.
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर के प्रमुख देवालयों में जीर्णोद्धार और नवनिर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गए हैं. महाकाल मंदिर में प्रतिदिन आने वाले लाखों श्रद्धालु मंगलनाथ और अन्य मंदिरों में भी पहुंचते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए मंगलनाथ मंदिर का कायाकल्प किया जा रहा है. उज्जैन विकास प्राधिकरण ने शिखर और फ्लोरिंग का कार्य शुरू कर दिया है.
22 करोड़ रुपए की आई दान राशि
खास बात यह है कि यह निर्माण कार्य सिंहस्थ मद से नहीं किया जा रहा, बल्कि मंगलनाथ मंदिर की अपनी आय से किया जा रहा है. पिछले चार वर्षों में मंदिर को लगभग 22 करोड़ रुपये की आय हुई है, जिसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
19 कलेक्टरों की सराहना
मंगलनाथ मंदिर के प्रशासक केके पाठक इस परियोजना की निगरानी कर रहे हैं. उनके कार्यकाल और अनुभव को देखते हुए 19 कलेक्टर्स ने उनकी कार्यशैली की सराहना भी की है. प्रशासक के प्रयासों से ही मंदिर की आय लगातार बढ़ रही है.
लाल पत्थर रेलिंग और फ्लोरिंग
नवभारत से चर्चा में विकास प्राधिकरण के अधिकारी सुनील नागर ने बताया कि शिखर पर लाल पत्थर लगाए जाएंगे. रैलिंग बनाई जाएगी और फ्लोरिंग का काम शुरू हो चुका है. पुराने डोम को भी नये स्वरूप में निखारा जाएगा. यह पहला चरण है.
दूसरे चरण में बड़ा प्रोजेक्ट
दूसरे चरण में मंदिर का बड़ा प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा. उसके लिए ड्राइंग और डिजाइन बनाई जा रही है. पूरा प्रोजेक्ट बनने के बाद मंदिर का स्वरूप और भव्य होगा. मन्दिर के कायाकल्प का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराना है. सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन सुविधा, भीड़ प्रबंधन और मार्ग व्यवस्था का लाभ मिलेगा.
धार्मिक वैभव और आधुनिकता
लाल पत्थरों से सजे शिखर और डोम मंदिर को दूर से ही विशेष पहचान देंगे. इससे प्राचीन धार्मिक वैभव के साथ आधुनिकता का मेल दिखाई देगा. मंगलनाथ मंदिर के रूप में उज्जैन के धार्मिक स्वरूप को और समृद्ध करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इनका कहना है…..
कंकड़ कंकड़ शंकर
भगवान मंगलनाथ मंदिर में भी वे श्रद्धालु आ रहे हैं जो महाकाल मंदिर दर्शन करने के लिए आते हैं साथ ही सभी देवालय शिवालय जाते हैं. यह उज्जैन के लिए गौरव की बात है कि यहां के कंकड़ कंकड़ को शंकर कहा जाता है. यही कारण है कि धार्मिक आस्था से शहर लगातार सराबोर हो रहा है. महाकुंभ 2028 के मद्देनजर भी जो योजनाएं बन रही है उसका लाभ श्रद्धालुओं को लगातार मिलेगा. मंगलनाथ मंदिर पर शिखर फ्लोरिंग और अन्य कार्य प्रारंभ कर दिए गए हैं.
– रोशन सिंह ,कलेक्टर उज्जैन
