जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने मध्य प्रदेश शासन को निर्देशित किया है कि याचिकाकर्ता सेवानिवृत्त प्राध्यापकों को छठवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुसार पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य वित्तीय लाभ का निर्धारण कर उसका भुगतान करें। हालांकि न्यायालय ने यह भी कहा है कि यदि इस मामले में सरकार की लंबित अपील पर कोई स्थगन मिलता है या अपील स्वीकार होती है तो याचिकाकर्ता उससे प्रभाविता होंगे।
याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी डॉ. सुशांत सिन्हा, रीवा की डॉ. दीपा खरे, भोपाल निवासी डॉ. अनुराधा मिश्रा सहित अन्य की ओर से यह मामले दायर किये गये है। जिनकी ओर से कहा गया कि उनकी प्राध्यापकों के पद पर वर्ष 2000 से पहले की है। नियमानुसार इनकी पेंशन छठवें वेतन आयोग के हिसाब से निर्धारित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस मामले में ग्वालियर बेंच ने महेश बाबू वाले प्रकरण में विस्तृत आदेश दिए हैं।
न्यायालय ने अपने आदेश में सरकार को निर्देश दिए हैं कि छठे वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार याचिकाकर्ताओं की पेंशन जारी करें और पेंशन के बकाया की गणना करें और उसी अनुसार उन्हें भुगतान करें। यह कार्रवाई तीन माह के भीतर करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं हाईकोर्ट ने इस मामले में मप्र अशासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ की याचिका को अपोषणीय बताते हुए उसे अस्वीकार कर दी।
