तेल अवीव, 01 सितंबर (वार्ता) इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को एक बार फिर बंधकों की चरणबद्ध रिहाई से इनकार कर दिया और कहा कि आंशिक युद्धविराम और बंधक-रिहाई समझौता “मेज पर नहीं है।
टाइम्स ऑफ इज़राइल की रिपोर्ट के अनुसार श्री नेतन्याहू ने हमास के साथ संघर्ष विराम पर अपने रुख को दोहराया। उनका यह यह बयान युद्ध कैबिनेट के छह घंटे लंबे सत्र के बाद आया। इस बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने कथित तौर पर किसी भी समझौते के लिए किसी भी आंशिक रूपरेखा को स्वीकार करने के खिलाफ आधिकारिक वोट के लिए दबाव डाला।
श्री नेतन्याहू ने कहा, “वोट की कोई आवश्यकता नहीं है। यह मेज पर नहीं है।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से भी प्रभावित हो सकता है, जिन्होंने प्रधानमंत्री को फोन किया था और उन्हें बताया था कि हमास के साथ किसी भी आंशिक समझौते को स्वीकार करने के बजाय इज़रायल को आतंकवादी समूह से “पूरी ताकत से” लड़ना चाहिए। चैनल 12 के अनुसार श्री ट्रम्प कथित तौर पर कहा, “आंशिक समझौतों को भूल जाइए। पूरी ताकत से आगे बढ़िए और इसे पूरा कीजिए।”
कहा जा रहा है कि श्री ट्रम्प श्री नेतन्याहू पर हमास को हराने के लिए गाजा में आईडीएफ की बढ़त को तेज़ करने का दबाव बना रहे हैं, क्योंकि उन्हें युद्धविराम और बंधक रिहाई वार्ता की प्रभावशीलता पर भरोसा नहीं रहा। हालाँकि,श्री नेतन्याहू के बयान की बंधकों के परिवारों और उनकी रिहाई के लिए प्रयासरत कार्यकर्ताओं ने कड़ी आलोचना की है। बंधकों और लापता परिवारों के फोरम ने नेतन्याहू पर “अपने राजनीतिक अस्तित्व की बलिवेदी पर बंधकों और सैनिकों की बलि चढ़ाने” का आरोप लगाया, जबकि एक ठोस प्रस्ताव विचाराधीन है और पिछले महीने हमास द्वारा चरणबद्ध बंधक-मुक्ति और युद्धविराम ढाँचे पर सहमति जताया गया था। फोरम ने कहा कि मौजूदा ढाँचा “एक समझौते में बदल सकता है” जिससे सभी बंधकों की वापसी हो जाएगी और युद्ध समाप्त हो जाएगा। बंधकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ हैं। इजरायल का मानना है कि 50 बंधकों में से अब केवल 20 ही जीवित हैं। आतंकवादी संगठन द्वारा शुरू में पकड़े गए 251 लोगों में से 28 की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि दो जीवित बंदी अस्वस्थ बताए जा रहे हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री ने गत अगस्त में कहा था कि आईडीएफ अब इस साल सितंबर के मध्य या अक्टूबर की शुरुआत तक गाजा शहर पर पूर्ण कब्ज़ा करने जा रहा है, और इसे युद्ध समाप्त करने का एकमात्र वास्तविक तरीका बताया था, हालाँकि सैन्य और राजनीतिक दोनों ही हलकों में उनके इस बयान की आलोचना हुयी थी। इजरायल ने कहा है कि केवल सभी बंदियों की व्यापक रिहाई और अपनी शर्तों पर युद्ध की समाप्ति के बाद ही वह गाजा में अपने सैन्य आक्रमण को रोक पाएगा। अब तक, इज़रायल का गाजा क्षेत्र के लगभग 75-80 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण है, और आईडीएफ सैनिकों ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाते जा रहे हैं।
