किफायती आवास की बिक्री बढ़ाने के लिए करों में छूट दे सरकार: नरेडको

नयी दिल्ली, 29 अगस्त (वार्ता) राष्ट्रीय रियल एस्टेट विकास परिषद (नरेडको) के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने पिछले कुछ समय से किफायती आवासों की घटती बिक्री पर चिंता जताते हुये शुक्रवार को कहा कि इससे निपटने के केंद्र और राज्य सरकारों को करों में छूट देनी चाहिये।
नरेडको के 17वें राष्ट्रीय सम्मेलन से इतर ‘यूनीवार्ता’ से बात करते हुये श्री हीरानंदानी ने कहा कि पिछली छह तिमाहियों में किफायती आवासों की बिक्री में कमी आयी है। इसका कारण यह है कि पिछले कुछ समय में जमीन की कीमत बढ़ी है, निर्माण की लागत बढ़ी है, सरकारी कर और अन्य सभी चीजें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा, “इन तीनों पर पुनर्विचार की जरूरत है। यह सिर्फ दिल्ली या एक दो शहरों की बात नहीं है, पूरे देश में जमीन की कीमत बढ़ रही है। हर जगह सर्किल रेट बढ़े हैं। जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर), स्टांप ड्यूटी, डेवलपमेंट शुल्क बढ़ाते समय वे (सरकार में बैठे लोग) सोच नहीं रहे हैं कि हमें किफायती आवासन को बढ़ावा देने की जरूरत है।”
सम्मेलन में जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय देश में किफायती 94 लाख किफायती आवासों की कमी है, जो साल 2030 तक बढ़कर तीन करोड़ पर पहुंच जायेगी। देश के आठ बड़े शहरों में मांग की तुलना में आपूर्ति मात्र 36 प्रतिशत है, जबकि साल 2019 में आपूर्ति मांग से पांच प्रतिशत अधिक थी।
हीरानंदानी समूह के सह संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री हीरानंदानी ने बताया कि उन्होंने सम्मेलन में और केंद्रीय आवासन एवं शहरी मामलों के सचिव के साथ चर्चा में स्पष्ट कहा है कि इस पर सरकार को राहत देनी होगी। वह लगभग छह महीने से हर जगह इसके लिए मांग उठा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जीएसटी में अगली पीढ़ी के सुधारों के तहत रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलने वाली है।
नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2030 तक किफायती आवासों की तीन करोड़ इकाइयों की कमी में 79 प्रतिशत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग से लोगों को प्रभावित करेगी। रिपोर्ट में किफायती घर उन्हें माना गया है, जिनकी कीमत 50 लाख रुपये से कम है। साल 2018 में कुल बिक्री में इसकी हिस्सेदारी 52.4 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 17 प्रतिशत रह गयी।
अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत किये जाने के रियल एस्टेट सेक्टर पर असर के बारे में पूछे जाने पर नरेडको चेयरमैन ने कहा, “देश के लिए अच्छा है। प्रधानमंत्री कह रहे हैं, आत्मनिर्भर भारत, और आप (आम लोग) भरोसा कर रहे हैं, अमेरिका पर। आत्मनिर्भर बन जाइये। अमेरिका पर कम भरोसा कीजिये। हमें चिंता नहीं करनी है, हमें आत्मनिर्भर बनना है।”

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