नयी दिल्ली, 26 अगस्त (वार्ता) ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी-भरकम आयात शुल्क लगाये जाने के बाद दोंनों देशों के बीच जारी व्यापार तनाव के बीच अमेरिकी दूतावास की एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका भारत को ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास हासिल करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों और सेवाओं के निर्यात में सहयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत-अमेरिकी व्यापार चैंबर (आईएसीसी) के यहां आयोजित तीसरे ऊर्जा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुये में अमेरिकी दूतावास की प्रधान वाणिज्य अधिकारी जियाबिंग फेंग ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में परिवर्तनकारी बदलाव ला सकता है। उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब हम भविष्य की ओर देखते हैं, अमेरिका उच्च गुणवत्ता वाले कार्य-वर्ग के उत्पादों और सेवाओं के निर्यात के माध्यम से भारत के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लक्ष्यों को हासिल कर सके।”
उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य बड़े परिवर्तन से गुजर रहा है। भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच बाजार और आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान ने कमजोरियों को उजागर किया है। भारत के ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों के अनुरूप अमेरिका तेल एवं गैस और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख भागीदार हो सकता है और भारत को इनका निर्यात कर सकता है।
सुश्री फेंग ने कहा कि प्राकृतिक गैस, परमाणु ऊर्जा और उभरती ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अमेरिकी विशेषज्ञता का विस्तार करके अमेरिका भारत के ऊर्जा सुरक्षा और ग्रिड आधुनिकीकरण के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों का समर्थन कर सकता है। अमेरिकी कंपनियां उत्पादों की बिक्री और भारत के साथ साझेदारी करने के लिए भी तैयार हैं दोनों के संदर्भ में।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुये प्रीमियर एनर्जीज लिमिटेड के मुख्य व्यावसायिक अधिकारी विनय रुस्तगी ने कहा कि में नवीकरणीय ऊर्जा स्थापना और सौर घटक विनिर्माण में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। भविष्य में नीतिगत समर्थन और सुधार उपायों के साथ भारत सौर मॉड्यूल के लिए वेफर्स और इंगोट्स के निर्माण में वृद्धि देखी जा सकती है।
आईएसीसी के क्षेत्रीय अध्यक्ष और एमिटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. अतुल चौहान ने कहा कि दोनों देशों को महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने, सौर मॉड्यूल क्षमताओं और परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को बढ़ाने और ग्रिड आधुनिकीकरण में निवेश करना चाहिए।
