
देवास/ नेमावर देवास जिले की खातेगांव तहसील के नेमावर में
में विकास के बड़े-बड़े दावों की हकीकत सामने आ गई है। 60 लाख रुपये खर्च कर तैयार किया गया गैस चलित शवदाह गृह आज भी अधूरा है। जबकि शवदाह गृह का दो-दो बार इसका उद्घाटन हुआ, लेकिन जब किसी परिवार को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत पड़ी, तो वहां न ऑपरेटर था और न कोई सुविधा।
जिसके बाद शव दाहगृह को शुरू कर दिया गया था लेकिन वापस से स्थिति वैसी की वैसी ही बनी हुई है
60 लाख की लागत से तैयार हुआ गैस चलित शवदाह गृह आज भी केवल अधूरा खड़ा है। दो-दो बार उद्घाटन जरूर हुआ, लेकिन व्यवस्था ठप है। शनिवार को इसकी पोल तब खुल गई जब एक परिवार अपने परिजन का अंतिम संस्कार कराने यहां पहुंचे तो न ही संचालन की कोई ठोस व्यवस्था है प्रशासन को चाहिए कि जल्द से जल्द इस अधूरे निर्माण को पूरा करे और स्थायी प्रबंधन उपलब्ध कराए।
सोचिए, जब किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटता है और अंतिम संस्कार के समय ऐसी परेशानियों से गुजरना पड़े तो यह संवेदनहीनता किस हद तक पीड़ा दे सकती है। लाखों की लागत से बने इस प्रोजेक्ट की उपेक्षा सिर्फ धन की बर्बादी नहीं, बल्कि नागरिकों के साथ अन्याय भी है।
मृतक के परिजन प्रदीप जाधव ने बताया- अंतिम क्रिया करने पूर्व जानकारी लेकर आए थे तो बताया था की यहां व्यवस्था है और शवदाह भी चालू है, लेकिन बंद पड़ा मिला ऑपरेटर जनरेटर की व्यवस्था नहीं है, दो घंटे के इंतजार के बाद अंतिम संस्कार किया गया।
मां नर्मदा के तट नेमावर में खातेगांव, सतवास, कांटा फोड़ और अन्य जगह से परिजन मृतकों के परिजनों द्वारा यहां अंतिम संस्कार के लिए मृतक को को लेकर जाते हैं बरसात में खुले में अंतिम संस्कार करने में बहुत परेशानी आती है
इनका कहना है।
शवदाह गृह मे कोई अव्यवस्था नहीं है बारिश दिनों में बिजली बार बार चली जाती है,आपरेटर नहीं होने से 1-2 दिन के लिए अव्यवस्था बनी है।
(आनंदीलाल वर्मा सी एम ओ नगर परिषद नेमावर
