मैड्रिड 13 अगस्त (वार्ता) स्पेन के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण कई इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। स्पेनिश मीडिया ने अपनी रिपोर्टों में यह जानकारी दी।
स्पेन समेत यूरोप के कई हिस्से इन दिनों भीषण आग की चपेट में हैं। रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, सूखे और तेज़ हवाओं के कारण जंगल की आग तेजी से फैल रही है, जिससे जानमाल का भारी नुकसान हो रहा है। यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी जारी रहने के साथ आपातकालीन दल स्पेन और पुर्तगाल के जंगलों में लगी आग से जूझ रहे हैं। मैड्रिड से 23 किलोमीटर उत्तर में स्थित ट्रेस कैंटोस नगरपालिका में लगी आग पर काबू पाने के लिए अग्निशमन कर्मी रात भर काम कर रहे हैं। उधर यूरोप में तेज गर्मी के कारण स्पेन और पुर्तगाल के कई क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं सामने आयी हैं।
न्यूज एजेंसी यूरोपा के अनुसार मैड्रिड के उपनगरीय क्षेत्र में आग के कारण ग्रैन होटल लॉस एंजेलिस से लगभग 100 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। आग की चपेट में आने से हालांकि एक व्यक्ति के गंभीर रुप झुलस गया और उसकी मौत हो गयी। मैड्रिड से लगभग 23 किमी उत्तर में स्थित ट्रेस कैंटोस में भी अग्निशमन कर्मी आग पर काबू पाने के लिए दिन रात प्रयास कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कैस्टिले और लियोन क्षेत्र में आग लगने की चौदह घटनाएं सामने आ चुकी है। इन घटनाओं के कारण विशेष रुप से प्रभावित लियोन और ज़मोरा क्षेत्रों से लगभग 2500 लोगों को अपना घर छोड़ कर अन्यत्र शरण लेनी पड़ी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अंडालूसिया में सोमवार को 2,000 लोगों को निकाला गया है लेकिन बाद में स्थानीय आपातकालीन सेवा ने 700 लोगों को उनके घरों को लौटने की अनुमति दे दी है।
वहीं, मैड्रिड स्वायत्त समुदाय की सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों के लिए एजेंसी ने कहा कि आग के परिणामस्वरूप 180 लोगों को निकाला है। इसके अलावा जंगल की आग के कारण मैड्रिड और गैलिसिया के बीच ट्रेन सेवाओं को भी रोक दिया गया है।
गौरतलब है कि कल दक्षिणी यूरोप के कई हिस्सों में भीषण गर्मी के कारण लगी जंगलों में लगी आग से तीन लोगों की मौत हो गयी और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इटली, फ्रांस, स्पेन, पुर्तगाल और बाल्कन में भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की गई है और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने का अनुमान जताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भीषण गर्मी का यह मौसम जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है।ब्रिटेन में रीडिंग विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के एक शोध वैज्ञानिक अक्षय देवरस ने कहा, “जलवायु परिवर्तन के कारण अब हम एक बहुत ही गर्म दुनिया में रह रहे हैं। कई लोग अभी भी इस खतरे को कमतर आंकते हैं।”
