नयी दिल्ली 13 अगस्त (वार्ता) दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि तिरंगा यात्रा न केवल स्वतंत्रता दिवस का उत्सव है बल्कि स्वच्छता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश भी देती है।
श्री सूद ने 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यहां जनकपुरी में बुधवार को ‘तिरंगा यात्रा’ का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “जनकपुरी के सभी संगठनों और यहां के नन्हें-मुन्ने बच्चे विकसित दिल्ली, विकसित जनकपुरी और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए आज भारी संख्या में एकत्रित हुए हैं। यह तिरंगा यात्रा न केवल स्वतंत्रता दिवस का उत्सव है, बल्कि स्वच्छता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश भी देती है।”
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त का दिन केवल झंडा फहराने और पतंग उड़ाने का दिन नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ सार्थक करने का अवसर है। उन्होंने देसी उत्पादों के प्रयोग पर बल देते हुए लोगों से आग्रह किया कि वह पतंग उड़ाते समय चाइनीज़ मांझा का प्रयोग न करें, बल्कि देशी मांझा और तिरंगी पतंग से आसमान को सजाएं। यह भी अपने देश के लिए कुछ सार्थक करने का उदाहरण बनेगा।
श्री सूद ने कहा कि आज देश को खून नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ कर गुजरने का जुनून, अच्छे संस्कार और समाज के लिए योगदान की आवश्यकता है।
उन्होंने करगिल के शहीदों को याद करते हुए कहा, “देश के प्रति जैसा समर्पित जीवन उन रणबांकुर युवाओं ने जिया वह हम सब के लिए प्रेरणास्रोत है। मात्र 20 से 25 साल के युवाओं ने देश के लिए जो बलिदान दिया वह अद्भुत है। मैं दिल से ये मानता हूं कि कुछ ना कुछ ज़रूर उन व्यक्तियों के अंदर होता है जिसके कारण वे लोग अपना जीवन इस देश के ऊपर कुर्बान कर देते हैं।”
श्री सूद ने यह भी कहा की हम सबको बॉर्डर पर जाने की जरूरत नहीं है । हम में से हर व्यक्ति को बॉर्डर पर जाकर दुश्मन का सामना नहीं करना बल्कि देश हित में ऐसे काम करने है जिनसे आने वाली पीढ़ियां हमे सदियों तक याद रख सकें।
इस अवसर पर भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि तिरंगा केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों की याद है, जिनके कारण हमें इसे लहराने का अधिकार मिला। 15 अगस्त 1947 की आज़ादी के पीछे भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष बोस और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के त्याग की अमिट गाथाएं हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में हुए अपमान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गांधी जी ने ट्रेन से उतारने का अपमान व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्र का अपमान मानते हुए अपना पूरा जीवन स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित कर दिया था।

