सुसनेर:इस बार परंपरागत राखियों के साथ ट्रेंडी और कस्टमाइज राखियों का अधिक बोलबाला है. खासतौर पर स्वदेशी राखियों की डिमांड अधिक है. बुरी नजर से बचाने वाले इस प्रतीक को अब फैशन और परंपरा के मेल में देखा जा रहा है. लोकल फॉर वोकल की तर्ज पर एक और जहां शहर के दुकानदार इस बार स्वदेशी राखियां ही बेच रहे हैं, तो वहीं घरों में भी स्वदेशी राखियां तैयार की जा रही हैं.
भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व इस बार 9 अगस्त को शुभ संयोग के साथ मनाया जाएगा. खास बात यह है कि इस बार स्वदेशी राखियां भाईयों की कलाई पर सजेंगी. इससे जहां मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी. वहीं महिलाएं व युवतियां आत्मनिर्भर बनेंगी. इसको लेकर नगर के घरों में स्वदेशी राखियां बनाई जा रही हंै, जिसमें भाई और बहन की फोटो भी लगी हुई है. ये राखियां पूरे नगर में आकर्षण का केन्द्र बिंदु बनी हुई हैं.
रेसिन आर्ट से बना रही राखी
वार्ड क्रमांक 10 के हरिनगर कॉलोनी में रहने वाली शुभांजली दिनेश राठौर के द्वारा इस तरह की स्वदेशी राखियां रेसिनआर्ट से बनाई जा रही है. जो फोटो के साथ बनाई जा रही हैं. इसमें अक्षत व कुमकुम के साथ भाई-बहन की फोटो भी लगाई जा रही है. इसको बांधने के लिए सूत के धागे का उपयोग किया जा रहा है, जो भाई बहन के पवित्र बंधन को और मजबूत करता है. शुभांजली राठौर बताती हैं कि उनके द्वारा बनाई जा रही स्वदेशी राखियां पूरे नगर में आकर्षण का केन्द्र बिंदु बनी हुई हैं. इसके चलते बड़ी मात्रा में नगर के बाजार में इसकी डिमांड अभी से ही होने लगी है.
