नई दिल्ली (वार्ता) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत विश्व में एक ऐसी व्यवस्था देखना चाहता है जो निष्पक्ष हो और जिसमें केवल कुछ देशों का प्रभुत्व नहीं बल्कि सभी देशों का प्रतिनिधित्व हो।
श्री जयशंकर राजधानी में बिम्सटेक देशों की एक सांस्कृतिक संध्या में भाग ले रहे थे । “सप्त सुर” नाम के इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में सदस्य देशों के परंपरागत संगीत प्रस्तुत किए गए। विदेश मंत्री ने इस अवसर पर देशों की परंपरा और पहचान के महत्व को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा , “हम जटिल और अनिश्चित समय में जी रहे हैं। हमारी सामूहिक इच्छा एक निष्पक्ष और प्रतिनिधित्वकारी वैश्विक व्यवस्था देखना की है, न कि कुछ लोगों के प्रभुत्व वाली। इस तलाश को अक्सर राजनीतिक या आर्थिक पुनर्संतुलन के रूप में व्यक्त किया जाता है…।” श्री जयशंकर का यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जबकि अमेरिका और नाटो के सदस्य देश भारत पर अपनी व्यापार नीति थोपना चाह रहे हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि परंपराओं का विशेष महत्व है क्योंकि अंततः वे पहचान को परिभाषित करती हैं। उन्होंने कहा,“अगर हम भविष्य को आकार देने के बारे में आश्वस्त होना चाहते हैं, तो हमें इस बात को लेकर आश्वस्त होना होगा कि हम क्या हैं। हमारे जैसे देशों के लिए, परंपराएँ वास्तव में शक्ति का एक बड़ा स्रोत हैं…।”
