‘आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति रेपो में 0.25 प्रतिशत की ‘अप्रत्याशित’ कमी भी कर सकती है’

नयी दिल्ली, 04 अगस्त (वार्ता) भारत के निर्यात पर अमेरिका में प्रशुल्क बढ़ाये जाने और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ज्यादातर बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) इस सप्ताह तटस्थ नीतिगत रुख बरकरार रखते हुए फौरी उधार के लिए अपनी ब्याज दर (रेपो) को वर्तमान स्तर पर बनाये रख सकती है। इसके विपरीत कुछ को नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की ‘अप्रत्याशित’ कमी किये जाने की संभावना भी दिखती है।
खुदरा मुद्रास्फीति के जून में करीब साढ़े छह साल के न्यूनतम स्तर आने से रिजर्व बैंक को मिले सुकून और वैश्विक चुनौतियों के बीच आर्थिक वृद्धि को संभालने की आवश्यकताओं के मद्देनजर कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक रेपो ( नितिगत ब्याज दर) 0.25 प्रतिशत और कम कर सकता है। विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जो मानता है कि एमपीसी ने फरवरी से अब तक कुल मिला कर एक प्रतिशत की बड़ी कमी पहले ही कर दी है, जिसमें जून की बैठक में 0.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती शामिल है। ऐसे में उनका मानना है कि रेपो को अभी 5.5 प्रतिशत पर बनाये रखा जा सकता है, लेकिन त्योहारी सीजन की कर्ज की मांग के लिए केंद्रीय बैंकों के पास नकदी का प्रवाह बढ़ाने के उपाय कर सकता है।
आरबीआई गवर्नर एमपीसी की तीन दिन की बैठक के निष्कर्षों की घोषणा बुधवार को करेंगे।
अमेरिका भारत के वस्तु और सेवा उद्योग का प्रमुख बाजार है और दोनों के बीच पारस्परिक व्यापार 100 अरब डॉलर से अधिक है। ट्रम्प प्रशासन ने भारत के खिलाफ एक अप्रैल से 25 प्रतिशत की दर से ऊंचा शुल्क लगाने की घोषणा की है। विश्लेषकों का अनुमान है कि निर्यात प्रभावित होने से भारत के जीडीपी में 0.20 से 0.40 प्रतिशत का झटका लग सकता है।
एमपीसी ने पिछली बैठक में चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था। उम्मीद है कि इस बैठक में इस अनुमान को बरकरार रखा जा सकता है।
भारतीय स्टेट बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री सौम्यकांति घोष और कुछ अन्य विश्लेषकों ने सप्ताहांत लिखा कि मुद्रास्फीति में कमी को देखते हुए रेपो दर में 0.25 अंक की कटौती की संभावना बनती है। श्री घोष की राय में ब्याज में कटौती के निर्णय को विलंबित किए जाने से उसका लाभ कम हो जाता है। उन्होंने लिखा है,“इस समय प्रतीक्षा करने का लाभ (सीमांत लाभ) कम है।”
कोटक महिंद्रा एएमसी के सीआईओ-ऋण दीपक अग्रवाल ने कहा कि इस साल पहले की तीन कटौतियों के बाद आरबीआई द्वारा अगस्त 2025 की अपनी नीति में रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर बनाये रखने की उम्मीद है। मज़बूत घरेलू बुनियादी ढांचे, घटती मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चिततायें तटस्थ रुख का समर्थन करती हैं। अमेरिका द्वारा लगाये गये आयात शुल्क भारत की जीडीपी वृद्धि को 0.30-0.40 प्रतिशत तक प्रभावित कम कर सकते हैं, लेकिन व्यापार वार्तायें समाधान
की उम्मीद जगाती हैं।
उन्होंने कहा कि जून 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति 2.1 प्रतिशत पर छह साल के निचले स्तर पर पहुंच गयी, अनुकूल मानसून ने कृषि उत्पादन में मदद की और मुद्रास्फीति कम हुई। श्री अग्रवाल की राय में, “ दरों में कटौती में फिलहाल विराम की संभावना है। बावजूद इसके, सहायक संकेतक आरबीआई को रेपो में 0.25 प्रतशत अंक की आश्चर्यजनक कटौती करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं—जो किसी टेस्ट मैच में आखिरी मिनट में चौका लगाने जैसा होगा। ”
रेलॉय के संस्थापक सीईओ अखिल सर्राफ ने कहा, “ खुदरा मुद्रास्फीति रिकॉर्ड निचले स्तर, कॉर्पोरेट निवेश में कमी और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट के साथ, ब्याज दरों में भारी कटौती ज़रूरी है।”
कोलियर्स इंडिया के राष्ट्रीय निदेशक और अनुसंधान प्रमुख विमल नादर ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और अमेरिका में आयात शुल्क में बदलाव के कारण अस्थिर व्यापारिक माहौल को देखते हुए, हम उम्मीद करते हैं कि केंद्रीय बैंक सतर्क रहेगा और अपनी मानक ब्याज दर को 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रखेगा। उनका मानना है एमपीसी के नीतिगत रुख फिलहाल तटस्थ जारी रहने की भी संभावना है, जो उदार मौद्रिक नीति चक्र के अंत का संकेत है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच, मौजूदा नीतिगत रुख बनाये रखने से वित्तीय लचीलापन सुनिश्चित होगा और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा। खासकर ऐसे समय जब घरेलू मुद्रास्फीति कम हो रही है मौजूदा रेपो दर को जारी रखने से स्थिरता मिलेगी। उनका मानना है कि यदि मुख्य मुद्रास्फीति अपने निम्न स्तर पर बनी रहती है, तो आने वाली तिमाहियों में रेपो दर में कमी देखी जा सकती है।
स्क्वायर यार्ड्स के सह-संस्थापक और मुख्य वित्तीय अधिकारी पीयूष बोथरा ने कहा, “ जून में की गयी अग्रिम ब्याज दरों
में कटौती और मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं, खासकर हाल ही में घोषित अमेरिकी शूल्कों को देखते हुए, हम उम्मीद करते हैं कि केंद्रीय बैंक प्रतीक्षा और निगरानी का रुख अपनाएगा और मौजूदा 5.50 प्रतिशत रेपो दर को बरकरार रखेगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि अक्टूबर की बैठक में रेपो में 0.25 प्रतिशत की उम्मीद की जारी है। ऐसा होता है तो आवास बाजार के लिए त्योहारी सीज़न में एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिलेगा।

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