खेलो इंडिया पहल से किशोरों को जीवन का उद्देश्य मिला: टॉड क्लार्क

जयपुर, 02 दिसंबर (वार्ता) भारतीय टेनिस सर्किट में एक जाना-पहचाना नाम बन चुके ऑस्ट्रेलियाई कोच टॉड क्लार्क ने खेलो इंडिया पहल सराहना करते हुए कहा कि इससे किशोरों को जीवन का उद्देश्य मिलता है। 2008 में भारत आने के बाद से क्लार्क ने यहां रहकर देश की संस्कृति को करीब से अपनाया है। वर्तमान में वे ओडिशा स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) में टेनिस निदेशक के रूप में काम कर रहे हैं और खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स राजस्थान 2025 में अपने खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। क्लार्क का कहना है कि खेलो इंडिया गेम्स ने देशभर में किशोरों को सही दिशा और उद्देश्य दिया है। क्लार्क साई मीडिया से कहा, “उबाऊ किशोरावस्था से ज्यादा परेशान करने वाली कोई चीज नहीं होती। इन खेलों ने देशभर में युवाओं को खेल अपनाने, उसमें आगे बढ़ने और करियर बनाने का मौका दिया है। खेल चरित्र भी विकसित करते हैं।”

30 से अधिक वर्षों से कोचिंग कर रहे क्लार्क ने भारत सरकार की फिट इंडिया के प्रति प्रतिबद्धता की भी सराहना करते हुए कहा, “वर्तमान केंद्र सरकार फिट इंडिया के विचार को लेकर काफी गंभीर है। ये खेल युवाओं में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाएंगे और खेल ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। जयपुर में अब तक जो सुविधाएं देखी हैं, वे प्रभावशाली हैं।”भारत आने के बाद क्लार्क पंजाब, गुजरात और हरियाणा में कोचिंग कर चुके हैं। वे 2025 समर वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स (जर्मनी) में भारतीय दल का हिस्सा भी थे, जहां पुणे की वैष्णवी अडकर ने महिलाओं की एकल स्पर्धा में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता। यह वलर्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारत का पहला महिला टेनिस पदक और 1979 में नंदन बाल द्वारा जीते गए रजत पदक के बाद केवल दूसरा टेनिस पदक है।

क्लार्क का मानना है कि भारत में टेनिस की अपार प्रतिभा है, लेकिन टैलेंट आइडेंटिफिकेशन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन की प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, “अच्छा टेनिस खिलाड़ी बनने के लिए एक निश्चित कद होना जरूरी होता है। लगभग छह फीट। अगर कोई खिलाड़ी 5 फीट 4 इंच है, तो उसके टॉप-क्लास खिलाड़ी बनने की संभावना कम होती है, इसलिए उसे ऐसा खेल चुनना चाहिए जो उसके अनुकूल हो। इसलिए सही सलाह देना बहुत जरूरी है।”उन्होंने जूनियर से सीनियर स्तर तक जाने के दौरान खिलाड़ियों को मिलने वाली सीमित वित्तीय सहायता पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “भारत में जूनियर खिलाड़ियों के लिए बहुत अवसर हैं, लेकिन सीनियर स्तर पर कम। उन्हें विदेश जाकर प्रतियोगिताओं में भाग लेना पड़ता है, जो काफी महंगा होता है। टेनिस महंगा खेल है। यही कारण है कि भारत के कई जूनियर खिलाड़ी सीनियर स्तर पर अपनी प्रगति बरकरार नहीं रख पाते।”

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