नयी दिल्ली, 28 जुलाई (वार्ता) ऊर्जा, कोयला, सूचना प्रौद्योगिकी और इस्पात क्षेत्रों के सुस्त प्रदर्शन के कारण चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के प्रदर्शन में गिरावट आयी है और उनकी राजस्व वृद्धि दर घटकर चार से छह प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।
बाजार अध्ययन एवं निवेश सलाह कंपनी क्रिसिल की सोमवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में 600 से ज्यादा कंपनियों के जारी वित्तीय परिणामों के अध्ययन के आधार पर यह बात कही गयी है। इन 600 कंपनियों के कुल राजस्व में एक-तिहाई का योगदान इन्हीं चारों क्षेत्रों का है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की कंपनियों के औसत राजस्व में लगभग सात प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इस साल इसके चार से छह प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। इसी प्रकार कर पूर्व लाभ (इबिटडा) भी साल-दर-साल आधार पर चार प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। हालांकि आईटी सेवा, ऑटोमोबाइल, रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद (एफएमसीजी) और फार्मा कंपनियों के दबाव में राजस्व के मुकाबले इबिटडा के अनुपात में 10 से 30 आधार अंकों की कमी आने का अनुमान है।
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुशन शर्मा ने कहा कि मानसून के जल्दी आने और जारी भू-राजनैतिक तनावों का कुछ सेक्टरों पर अप्रैल-जून तिमाही में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। बारिश के कारण तापमान कम रहने से बिजली की मांग में कमी आती है। इससे एक साल पहले के मुकाबले ऊर्जा क्षेत्र के राजस्व में आठ प्रतिशत की गिरावट आयी है। इससे कोयले की मांग में भी दो-तीन प्रतिशत की कमी आयी है।
उन्होंने बताया कि भू-राजनैतिक अनिश्चितता के कारण आईटी सेवा क्षेत्र की राजस्व वृद्धि दर लगभग स्थिर रही है। आयात शुल्क की चिंता के कारण परियोजनाओं में देरी हुई है।
क्रिसिल की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पहली तिमाही में स्टील सेक्टर का राजस्व एक से तीन प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र के राजस्व में चार प्रतिशत और निर्माण क्षेत्र का छह प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।
वहीं, सुस्ती के बीच फार्मा क्षेत्र, दूरसंचार सेवा, संगठित रिटेल, एल्युमीमियम और विमान सेवा क्षेत्र की कंपनियों का राजस्व बढ़ने की उम्मीद है। फार्मा क्षेत्र का राजस्व 9-11 प्रतिशत, दूरसंचार सेवा क्षेत्र का 12 प्रतिशत, एल्युमीनियम कंपनियों का लगभग 23 प्रतिशत और विमान सेवा क्षेत्र का 15 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।
विज्ञप्ति के अनुसार, इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों से मांग आने से एफएमसीजी सेक्टर की बिक्री में पहली तिमाही में चार से पांच प्रतिशत, सीमेंट में तीन से चार प्रतिशत और स्टील में सात से नौ प्रतिशत की बढ़त का अनुमान है।
