
खरगोन। जिले में पिछले कुछ समय में उत्पादित रसायनिक कपास को जैविक बताकर विदेशों में सप्लाय कर मोटी रकम हासिल करने का मामला गर्माया हुआ है। इसमें शहर के प्रतिष्ठित व्यापारियों और कंपनियों के नाम भी उजागर किए जा रहे है। अब तक जिले तक सीमित यह मामला एकाएक दिल्ली पहुंच गया है।
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री ने दिल्ली में प्रेसवार्ता आयोजित कर जैविक कपास के नाम पर 2.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप लगाते हुए इसकी जांच के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में सीबीआई के नेतृत्व में एसआईटी का गठन करने की मांग की है। कांग्रेस पार्टी ने कहा कि इस घोटाले से भारत की जैविक उत्पादों को लेकर वैश्विक विश्वसनीयता पर बट्टा लगा है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रेसवार्ता में श्री सिंह के साथ मौजूद शहर कांग्रेस अध्यक्ष पूर्णा ठाकुर ने पत्रकारों को दस्तावेज भी उपलब्ध कराए है।
सिंह ने कहा कि इस तरह की धोखाधड़ी में न केवल भारी टैक्स और जीएसटी चोरी भी हुई है, बल्कि भारत के जैविक उत्पादों की विश्व बाजार में बदनामी हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में 12 लाख किसानों ने 1.05 ट्रिलियन रुपये मूल्य का कपास उगाया, लेकिन व्यावसायिक संस्थाओं ने इसे अजैविक बताकर खरीदा और इसे कई गुना कीमत पर जैविक बताकर बेच दिया।
उन्होंने मांग की कि सभी 192 धोखाधड़ी वाले आईसीएस समूहों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो। सभी आईसीएस समूहों की जांच हो और शोषित किसानों को उचित मुआवजा मिले।
