बैतूल। जिले के खंजनपुर क्षेत्र स्थित खुशी विला में बुधवार को एक अनूठी पहल देखने को मिली, जब किन्नरों ने देश के वीर सैनिकों के लिए अपने हाथों से तिरंगा राखियां तैयार कीं। दो घंटे की मेहनत में बनीं ये राखियां बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के राष्ट्र रक्षा मिशन को सौंपी गईं, जो रक्षाबंधन के मौके पर इन्हें देश की सीमाओं पर तैनात जवानों तक पहुंचाएगा।
राष्ट्र रक्षा मिशन की संस्थापक गौरी बालापुरे पदम ने बताया कि यह परंपरा वर्ष 1999 में कारगिल विजय के बाद शुरू हुई थी और तब से अब तक लगातार जारी है। चाहे कर्फ्यू हो, प्राकृतिक आपदाएं हों या ट्रेन रद्द हो जाए इस मिशन ने कभी रुकना नहीं सीखा। रजत जयंती वर्ष में मिशन ने बस से बाड़मेर तक का सफर कर इतिहास रचा था।
इस वर्ष भी 9-10 अगस्त को समिति का 30 सदस्यीय दल भारत-पाक सीमा पर जाकर सीमा सुरक्षा बल के जवानों की कलाई पर राखी बांधेगा। पिछले 25 वर्षों में बैतूल की बहनों ने देश की लगभग सभी सीमाओं पर सैनिकों को राखी बांधी है। जिन सरहदों पर दल पहले पहुंच चुका है, वहां इस बार राखियां डाक के माध्यम से भेजी जाएंगी। कारगिल के शहीद स्मारकों के लिए भी हर साल राखियां भेजी जाती हैं। इस अभियान के तहत 10 से 35 वर्ष की आयु की युवतियों/महिलाओं को राष्ट्र रक्षा मिशन 2025 में शामिल होने का अवसर दिया जाएगा।
