फाइलों में स्मार्ट धरातल पर लाचार: गुना के खुशालपुर में आजादी के बाद भी सड़क, पानी और श्मशान को तरस रहे लोग

चंद्रप्रकाश मांझी गुना। जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर गुना जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत माहौर से जुड़े खुशालापुर के ग्रामीण आज भी सड़क, पानी और श्मशान जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिला मुख्यालय के इतने नजदीक होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों ने इस पंचायत की सुध नहीं ली है। आलम यह है कि सरकारी दस्तावेजों में तो माहौर पंचायत का विकास तेजी से दौड़ रहा है, लेकिन धरातल पर हकीकत बेहद दयनीय है। प्रशासनिक अधिकारियों और

ग्राम पंचायत माहौर के अंतर्गत आने वाले खुशालपुर (खामखेड़ी) गांव की आबादी करीब एक हजार है। ‘नवभारत’ की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर जाकर हालात देखे, तो विकास के दावों की पोल खुल गई। गांव में प्रवेश के लिए वर्षों पुरानी एक संकरी और

खुले आसमान के नीचे चबूतरे पर होता है मृतकों का अंतिम संस्कार।

कच्ची पगडंडी ही एकमात्र रास्ता है। गांव के प्रवेश द्वार पर ही नाले के ऊपर बनी पुलिया बरसों से

टूटी पड़ी है। इसके चलते बारिश के मौसम में नाला उफान पर आते ही ग्रामीणों का संपर्क जिला

वादे कर भूल गया प्रशासन

दरअसल, साल 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान खुशालपुर (खामखेड़ी) के ग्रामीणों ने इन्हीं बुनियादी समस्याओं को लेकर मतदान का पूर्ण बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया था। तब आनन-फानन में जिला प्रशासन की एक टीम गांव पहुंची थी और ग्रामीणों को लिखित-मौखिक आश्वासन दिया था कि वे लोकतंत्र के पर्व में हिस्सा लें, चुनाव के तुरंत बाद उनकी सभी समस्याओं का निराकरण कर दिया जाएगा। अधिकारियों के भरोसे पर ग्रामीणों ने वोट तो डाल दिया, लेकिन आज करीब 2 साल का लंबा समय गुजर जाने के बाद भी प्रशासन अपना वादा पूरा नहीं कर पाया है और हालात जस के तस बने हुए हैं।

मुख्यालय से पूरी तरह कट जाता है और लोग हफ्तों तक गांव में कैद रहने को मजबूर हो जाते हैं।

इसके अलावा, सरकार की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना भी यहां बेअसर साबित हुई है। योजना के तहत घरों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक केवल टेस्टिंग के दिन ही इसमें पानी दिखा था, तब से आज तक नल सूखे पड़े हैं। वर्तमान में पूरी

आबादी सिर्फ दो शासकीय हैंडपंपों के भरोसे अपनी प्यास बुझा रही है।

गांव के श्मशान घाट की स्थिति भी बदहाल है; अंतिम संस्कार के नाम पर बिना छत का एक छोटा सा खुला चबूतरा है, जिससे बारिश में अंतिम संस्कार करने में भारी परेशानी होती है। नाले पर बना स्टॉप डैम भी पूरी तरह टूट चुका है।

समस्या तो है, करेंगे समाधान

ग्राम पंचायत के कुछ विकास कार्यों के लिए फिलहाल बजट का अभाव है। जहां तक प्रवेश द्वार की टूटी पुलिया का सवाल है, तो उसका निर्माण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत होना है। हमने इसका प्रस्ताव बनाकर उच्च स्तर पर भेज दिया है, स्वीकृति मिलते ही काम शुरू करा दिया जाएगा। वहीं, पेयजल समस्या के लिए नए ट्यूबवेल का खनन होना है, जिसके लिए पीएचई विभाग को पत्र लिखा जा चुका है। अन्य जो भी समस्याएं ग्राम पंचायत स्तर की हैं, उनका निराकरण शीघ्र ही कराया जाएगा। कुछ काम मेरे कार्यकाल से पहले ही अधूरे पड़े हैं।

अरविंद धाकड़, सचिव ग्राम पंचायत माहौर

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