चेन्नई, 24 जुलाई (वार्ता) एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को कहा कि साइबर हमलों की कम रिपोर्टिंग एशिया-प्रशांत के जारीकर्ताओं के बीच सुरक्षा की एक झूठी भावना उत्पन्न कर सकती है और कड़े नियमों का पालन साइबर तैयारी एवं संबंधित क्रेडिट गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है।
‘साइबर जोखिम ब्रीफ: हालिया डेटा उल्लंघनों का एशिया प्रशांत जारीकर्ताओं पर प्रभाव’ शीर्षक वाली एक रिपोर्ट को आज जारी किया गया जिसमें कहा गया कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में साइबर जोखिम बढ़ रहे हैं।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की क्रेडिट विश्लेषक श्रुति जटाकिया ने कहा, “एशिया-प्रशांत क्षेत्र के जारीकर्ता किसी भी अन्य क्षेत्र की तरह साइबर खतरों के प्रति उतने ही संवेदनशील हैं।”
उन्होंने कहा, “हमारा मानना है कि इस क्षेत्र में किसी तथ्य के सार्वजनिक खुलासे को लेकर नियम नहीं हैं जिसकी वजह से सायबर खतरों के मामले कम दर्ज होते हैं। इससे गलत धारणा बन सकती है कि एशिया-प्रशांत कम संवेदनशील है।”
उन्होंने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला एवं तृतीय-पक्ष सेवा प्रदाताओं की कमज़ोरियां अतिरिक्त जोखिम उत्पन्न करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साइबर घटनाएं क्रेडिट गुणवत्ता को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करती हैं।
इससे जुड़े नकारात्मक जोखिम धीरे-धीरे उभरेंगे और रेटिंग बफर पर निर्भर करेंगे। नियामक कार्रवाई, बाजार हिस्सेदारी में कमी, प्रतिष्ठा को नुकसान, आपूर्ति-श्रृंखला में व्यवधान और सुधार लागत जैसे कारकों से व्यावसायिक स्थिति कमजोर हो सकती है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने कहा कि यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता कि संभावित जुर्माना या परिचालन संबंधी व्यवधानों का नकदी प्रवाह और उद्यामन पर प्रभाव पड़ने में कितना समय लगेगा।

