BSF की तैयारी अब रासायनिक और आधुनिक युद्ध के लिए


ग्वालियर:टेकनपुर बीएसएफ अकादमी टेकनपुर के निदेशक डॉ. शमशेर सिंह ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि देश में हाल ही में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बीएसएफ ने अपने प्रशिक्षण में बड़ा बदलाव किया है। इस क्रम में आज से टेकनपुर में ‘स्कूल ऑफ ड्रोन’ की शुरुआत की गई है जिसमें ड्रोन तकनीक, वारफेयर, ड्रोन कमांडो और ड्रोन वारियर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। पहले बैच ने आज से प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है।

डॉ. सिंह ने बताया कि युद्ध की नई तकनीक को देखते हुए ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली में प्रशिक्षित जवानों की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है। हाल ही में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर के दौरे के दौरान टेकनपुर स्थित महाविद्यालय में ड्रोन लैब का शुभारंभ किया गया था।

अब अकादमी में सहायक कमांडेंट से लेकर आरक्षक स्तर तक के सभी कार्मिकों को ड्रोन तकनीक का प्रशिक्षण दिया जाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि बीएसएफ में अब देशी नस्ल के रामपुर हाउंड कुत्तों को प्रशिक्षण देना शुरू किया गया है। यह प्रधानमंत्री के निर्देशानुसार एक बड़ी पहल है। इस नस्ल की रिया नामक कुतिया को प्रशिक्षण देकर विभिन्न स्पर्धाओं में पुरस्कार दिलाए गए हैं। इससे विदेशी नस्लों पर होने वाले खर्च की भी बचत हो रही है और परिणाम भी बेहतर मिल रहे हैं।

रासायनिक युद्ध की संभावना पर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. सिंह ने कहा कि बीएसएफ सभी प्रकार के युद्ध संभावनाओं पर नजर रखती है और उन्हें प्रशिक्षण का हिस्सा बनाती है। भविष्य में आधुनिक हथियारों से युद्ध होगा, जिनका निर्माण बीएसएफ की यूनिट ‘सेनवेस्टो’ में किया जाएगा।

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