सतवास: सतवास चन्द्रकेशर मध्यम परियोजना की एलबीसी मुख्य नहर जो कि 18 करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई है एक बार फिर सवालों के घेरे में है। निर्माण के समय भैरूपुरा माइनर में नहर की सीसी लाइनिंग टूटी थी तब, जल संसाधन विभाग ने जांच में भैंस मवेशियों को दोषी ठहराया गया था। अब वहीं नहर पहली बारिश में ही धराशाई हो कर बहने लगी है कही पर गहरी दरारें और उखड़ती सीमेंट सामने आई हैं, लेकिन इस बार इसमें जानवर नजर नहीं आया।
बल्कि समस्या मवेशियों की नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता में है। तस्वीरों में नहर की सतह फटी हुई है, नहर उखड़ चुकी हैं और कहीं-कहीं गड्ढे जैसे हालात बन गए हैं। पहले ही मामले में मंत्री तक को संज्ञान लेना पड़ा था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई न ठेकेदार पर हुई, न किसी अधिकारी पर, यह भी विचारनिय है इसके निर्माण में बाल मजदूर काम में लगाए गए थे जो कि बाल श्रम कानून का उल्लंघन था.
ग्रामीण बोले – 18 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं टिक रही नहर
ग्रामीणों का कहना है कि शुरू से ही इस नहर में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर संदेह रहा है।ठेकेदार और अधिकारी यो का “हर बार बहाना नया होता है – कभी नहर टूटती है तो भैंस, मवेशियों के कारण टूटना बता दिया जाता हैं कभी चुप्पी, लेकिन नहर बार-बार टूट रही है, दरारें आ रही हैं और जिम्मेदारी तय नहीं हो रही।”हर पहलू उजागर कर रहा एक ही बड़ी सच्चाई – गड़बड़ी ही गड़बड़ी 18 करोड़ की लागत से बनी नहर के हालात कई परतों में सच्चाई उजागर कर रहे हैं – एक तरफ बार-बार टूटता घटिया निर्माण, दूसरी ओर नाबालिगों से कराया गया गैरकानूनी काम।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बार-बार सामने आती गड़बड़ियों के बाद भी जब जिम्मेदार बचते रहें,तो खेल सिर्फ भैंसों मवेशियों का नहीं, सिस्टम का है।
इस संदर्भ में संबंधित विभाग अधिकारी यो द्वारा वही रटा रटाया जवाब दुरुस्त कराने की बात कही है,आया है।
