जबलपुर: हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए के सिंह ने युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अपीलकर्ता ने प्रापर्टी डीलर के घर से बाहर आने पर चाकू से हमला किया था। साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को हत्या के अपराध में सजा से दंडित किया जाना उचित है।
छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्ना थानान्तर्गत निवासी बाबूलाल की तरफ से दायर अपील में कहा गया था कि उसके घर के समीप जितेन्द्र नामक युवक रहता था, जो प्रॉपर्टी डीलर का काम करता था। दोनों के परिवार एक-दूसरे से परिचित थे। अभियोजन के अनुसार अपीलकर्ता 24 मई 2015 की शाम को जितेन्द्र के घर गया और डोर बेल बजाई थी। डोल बेल कर आवाज सुनकर जितेन्द्र ने दरवाजा खोला तो देखा कोई नही था।
वह आंगन में आया तो आरोपी ने उसके सीने पर चाकू से प्रहार करने के बाद भाग गया। जितेन्द्र ने उसके पीछे भाग और कुछ दूर जाने के बाद गिर गया। घायल को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया और उसकी मृत्यु हो गयी।अपील में कहा गया था कि जिला न्यायालय ने साल 2017 में हत्या के अपराध में उसे आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। उसका उद्देश्य जितेन्द्र की हत्या करना नहीं था और चाकू के सिर्फ एक प्रहान से उसकी मौत हो गयी। याचिका में राहत चाही गयी थी कि अपराध को गैर इरादतन हत्या का प्रकरण माना जाये।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि आरोपी युवक चाकू लेकर घटना को अंजाम देने गया था। प्रकरण में ऐसे कोई तथ्य नहीं है कि उसे गैर इरादतन हत्या का अपराध माना जाये। युगलपीठ ने जिला न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए अपील को खारिज कर दिया।
