
मोनिका कपूर पर बैंक धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप; 1999 से सीबीआई की ‘मोस्ट वांटेड’ सूची में शामिल थी, प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू।
नई दिल्ली, 9 जुलाई, 2025 (नवभारत): लगभग 25 वर्षों से कानून से भाग रही मोनिका कपूर, जिसे सीबीआई अपनी ‘मोस्ट वांटेड’ भगोड़ा सूची में रखे हुए थी, अब सीबीआई की हिरासत में है। उसे संयुक्त राज्य अमेरिका से भारत वापस लाया जाएगा, जिससे एक दशक से भी पुराने बैंक धोखाधड़ी मामले में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है। मोनिका कपूर एक ऐसा नाम है जो 1999 से भारत में विभिन्न वित्तीय अपराधों से जुड़ा हुआ है।
मोनिका कपूर पर आरोप है कि वह एक बड़े बैंक धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के मामले में शामिल थी। यह मामला 1990 के दशक के अंत का है, जब उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और योजनाओं का उपयोग करके बैंकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया था। 1999 में जब सीबीआई ने उसके खिलाफ जांच शुरू की और कार्रवाई की, तो वह भारत से फरार हो गई और अमेरिका में शरण ले ली। तब से सीबीआई लगातार उसे भारत लाने का प्रयास कर रही थी, और इसके लिए इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था।
लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रत्यर्पण, क्या है आगे की प्रक्रिया?
मोनिका कपूर का भारत प्रत्यर्पण एक लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों के बीच गहन सहयोग शामिल था।
माना जा रहा है कि अमेरिकी न्याय विभाग ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध को स्वीकार कर लिया है, जिसके बाद उसे सीबीआई को सौंप दिया गया है। अब उसे जल्द ही भारत वापस लाया जाएगा, जहाँ उसके खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई फिर से शुरू की जाएगी। उसकी गिरफ्तारी से उम्मीद है कि इस धोखाधड़ी मामले से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सकता है, और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
