सीहोर. पिछले साल की तरह इस बार भी खरीफ सीजन में नकली व अमानक उर्वरकों की बिक्री के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. हाल ही में जिले के अनेक किसानों ने प्रशासन के समक्ष अमानक उर्वरक से हुए फसलों के नुकसान से अवगत कराया था. राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त उर्वरकों के नमूनों की प्रयोगशाला जांच में यह पाया गया है कि कुछ उर्वरक उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं तथा इन्हें अमानक घोषित किया गया है. उर्वरकों की 16 निर्माण इकाईयों में अनियमितता पाई गई है. इन उत्पादों के उपयोग से किसानों के फसल उत्पादन एवं गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के उपसंचालक अशोक कुमार उपाध्याय ने अमानक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के उर्वरकों जैसे प्रोम, पोटश ड्रिराविड फाम गोलासिस, बायोस्टीमूलेन्ट, केरियर बेस्ड कन्सोर्टिया, जिंक सल्फेट मोनोहाइड्रेट एवं अन्य उर्वरकों के बिना पूर्वानुमोदन के जिले में विक्रय, भंडारण, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. उन्होंने निर्देश दिए हंै कि बिना पूर्व स्वीकृति के किसी भी स्थिति में इनका उपयोग न किया जाए. इसके साथ ही इससे संबंधित सभी व्यापारी वितरक एवं कृषकों को सतर्क किया जाए. इसका उल्लंघन दंडनीय है. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग का अमला सतत निरीक्षण कर रहा है.
