भोपाल। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि विषयासक्त मन बंधन का कारण है, विषयारिक्त मन मुक्ति का आधार है। उन्होंने कहा मनुष्य न तो शेर जैसा पराक्रमी है, न चीते जैसा फुर्तीला, फिर भी वह महान है क्योंकि उसके पास विचार और संकल्प की शक्ति है। मनुष्य अपने मन की दिशा तय करता है, सही दिशा में जाने वाला नर से नारायण बनता है, गलत दिशा वाला नर से नारकीय। मुनि श्री ने कहा कि सोच व्यक्ति के व्यक्तित्व का एक्सरे है, इसलिए बोली से अधिक सोच पर ध्यान दें। मन की वृत्ति बदले बिना परिणाम नहीं बदलता। उन्होंने कहा भौतिक साधन बुरे नहीं, लेकिन उन्हें जीवन का लक्ष्य बनाना गलत है। व्यवहार में सम्मान और सोच में आध्यात्मिकता ही मुक्ति का मार्ग है।
