
रायसेन,जिले में एंबुलेंस कभी सड़क के डिवाइडर पर चढ़ जाती है, या मरीज को लेने समय पर नहीं पहुंचती है। वहीं गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने में भी मदद नहीं कर रही हैं। लचर स्वास्थ्य सेवाओं के चलते एक महिला को घर पर ही बच्चे को जन्म देने को मजबूर होना पड़ा।
76 बार 108 नंबर पर फोन किया गया लेकिन एंबुलेंस नहीं आई जिससे महिला ने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया। यह मामला रायसेन जिले के ग्राम बावलिया का है। जब एक गर्भवती महिला निकिता अहिरवार को प्रसव पीड़ा के दौरान समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। उसके पति हेमू अहिरवार ने शनिवार रात 10 बजे से सुबह 11 बजे तक 76 बार 108 एंबुलेंस सेवा पर कॉल किया, लेकिन हर बार अलग-अलग बहाने देकर कॉल टाल दिया गया। कभी कहा गया कि रास्ता खराब है, कभी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई, लेकिन किसी भी हालत में सहायता नहीं पहुंची। इस दौरान मजबूर होकर महिला ने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जच्चा-बच्चा दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है।
खुले नहीं अस्पताल के ताले, ग्रामीण परेशान-
गांव में 10 फरवरी 2025 को 1 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण किया गया था, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी इसके ताले नहीं खुले हैं। ऐसे में ग्रामीणों को मजबूरी में निजी अस्पतालों या झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
इनका कहना है।
गर्भवती महिला की घर पर ही डिलेवरी हो गई थी। लेकिन बाद में महिला को जिला चिकित्सालय में भर्ती करा दिया गया है। महिला और बच्ची दोनों पूरी तरह से सुरक्षित हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को लिखकर एम्बुलेंस चालक पर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ रवि राठौर, बीएमओ सांची।
