गावों, शहरों में लोगों की भोजन-कैलोरी बढ़ी है, प्रोटीन के लिए अनाज पर निर्भरता कम हो रही है: सर्वे

नयी दिल्ली, (वार्ता) घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2022-23 और 2023-24 के अनुसार 2009-10 से 2023-24 की अवधि में अखिल भारतीय स्तर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कैलोरी सेवन में मामूली वृद्धि देखी गयी है और प्रोटीन के लिए अनाज पर निर्भरता कम हुई है।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी भारत में ‘पोषण आहार सेवन’ शीर्षक इस सर्वे रिपोर्ट के सारांश के अनुसार वर्ष 2009-10 से ग्रामीण और शहरी भारत में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन प्रोटीन सेवन में भी इसी तरह की वृद्धि देखी गयी है।

इस सर्वे के निष्कर्षों के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर पांच खाद्य समूह- अनाज, दालें, दूध और दूध से बने उत्पाद, अंडा-मछली-मांस और अन्य खाद्य पदार्थों पर आधारित प्रोटीन सेवन में अनाज प्रोटीन का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत बने हुए हैं। दोनों अवधियों में ग्रामीण भारत के लिए अनाज आधरित प्रोटीन की हिस्सेदारी लगभग 46-47 प्रतिशत और शहरी भारत के लिए लगभग 39 प्रतिशत है।

सर्वे के अनुसार सर्वे के अनुसार 2023-24 में ग्रमीण क्षेत्रों में लोगों के कुल प्रोटीन सेवन में औसतन 45.9 प्रतिशत अनाजों, 8.7 प्रतिशत दालों, 11 प्रतिशत दूध और दुग्ध उत्पाद, 12.4 प्रतिशत अंडा-मछली-मांस तथा 22 प्रतिशत अन्य उत्पादों के सेवन पर आधारित था।

इसी दौरान शहरी क्षेत्रों के लोगों के प्रोटीन के सेवन में इन खाद्यों का अनुपात क्रमश: 38.7 प्रतिशत, 9.1 प्रतिशत, 12.9 प्रतिशत 14.1 प्रतिशत और 25.3 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009-10 की तुलना में प्रोटीन के लिए अनाज का योगदान ग्रामीण भारत में लगभग 14 प्रतिशत और शहरी भारत में लगभग 12 प्रतिशत कम हुआ है। अनाज के हिस्से में गिरावट को ग्रामीण और शहरी भारत में अंडे, मछली और मांस अन्य खाद्य पदार्थों के हिस्से में उल्लेखनीय वृद्धि और दूध और दूध उत्पादों के हिस्से में मामूली वृद्धि द्वारा संतुलित किया गया है।

रिपोर्ट के निष्कर्षों में कहा गया है कि 2022-23 और 2023-24 में ग्रामीण और शहरी भारत में प्रति व्यक्ति और प्रति उपभोक्ता इकाई कैलोरी सेवन के औसत में एक समान पैटर्न देखा जाता है। ग्रामीण भारत में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसत कैलोरी सेवन वर्ष 2022-23 और 2023-24 में क्रमशः 2233 किलो कैलोरी और 2212 किलो कैलोरी था, जबकि शहरी भारत में इन दो वर्षों के लिए ये आंकड़े क्रमशः 2250 किलो कैलोरी और 2240 किलो कैलोरी थे।

ग्रामीण भारत में निचले पांच अंश वर्गों के लिए औसत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन और प्रति उपभोक्ता इकाई प्रतिदिन कैलोरी सेवन में 2022-23 से 2023-24 में वृद्धि देखी गयी है, जबकि शहरी क्षेत्रों में निचले छह फ्रैक्टाइल वर्गों (अंश वर्गों) के लिए 2023-24 में वृद्धि देखी गयी है।

वर्ष 2022-23 के साथ-साथ 2023-24 में प्रमुख राज्यों में औसत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कैलोरी सेवन और औसत प्रति उपभोक्ता इकाई प्रति दिन कैलोरी सेवन दोनों में व्यापक भिन्नता देखी गयी है।

रिपोर्ट के अनुसार मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय (एमपीसीई) में वृद्धि के साथ, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में औसत कैलोरी सेवन भी बढ़ जाता है।

मंत्रालय ने कहा कि किसी परिवार द्वारा खाद्य पदार्थों की खपत में परिवार के सदस्यों द्वारा वास्तविक खपत शामिल होती है और इसके साथ-साथ, संदर्भ अवधि के दौरान परिवार द्वारा तैयार किये गये और परिवार से बाहर के सदस्यों यानी मेहमानों और अन्य लोगों को परोसे गये भोजन की खपत भी शामिल होती है। इसके अलावा, सदस्यों और मेहमानों के उपभोग के लिए बाजार से खरीदा गया पका हुआ भोजन भी खरीदार के घर में दर्ज किया जाता है।

 

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