
बरसों पुराने कार्यकर्ता अपने और अभी तक अधिकांश समय परदे के पीछे रहकर जो काम सौंप दिया जाता उसको बेहतर ढंग से संपादित करने का काम करते हैं।
2008 में जब हमने फैसला किया तो उनको उपचुनाव लड़ना है लोकसभा का तब मुझे तीन बार मना करने आए नहीं नहीं रहने दो आप लेकिन हमने कहा नहीं उस समय संगठन ने तय किया कि हेमंत खंडेलवाल ही चुनाव लड़ेंगे, लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए उपचुनाव में और नर्मदापुरम के लिए तो अगर कभी भी कोई संभा के लिए काम सौंपना होता कोई चुनौती आती और जरूरत पड़ती कि इस समस्या को कन्यदान कौन करे, समाधान कौन करे तो हम लोगों को एक ही नाम ध्यान में आता था श्री हेमंत खंडेलवाल और चुनाव के तो वो बेतूल लोकसभा जिसमें हरदा भी आता था पर्मानेंट ही प्रभारी जब जरूरत पड़ी भेज दो लेकिन जो काम हेमंत जी को दिया उसको सफलता के साथ पूरे समर्पित भाव से उन्होंने संपन्न करके बताया।
