नेशनल गेम्स और खेलो इंडिया के एथलीटों के लिए एंटी-डोपिंग जागरूकता सत्र अनिवार्य होंगे: डॉ. मांडविया

नयी दिल्ली, 25 जून (वार्ता) केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने गुरूवार को नई दिल्ली में नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनडीटीएल) की कार्यप्रणाली, क्षमताओं और भविष्य की कार्ययोजना का आकलन करने के लिए एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

डोपिंग के खिलाफ एहतियाती उपायों के महत्व पर जोर देते हुए, डॉ. मंडाविया ने कहा, “नेशनल गेम्स और खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले एथलीटों के लिए एंटी-डोपिंग जागरूकता सत्र अनिवार्य होंगे।”

उन्होंने साफ-सुथरे खेल को बढ़ावा देने और अनजाने में होने वाले डोपिंग उल्लंघनों से एथलीटों को बचाने के लिए उनके खेल करियर की शुरुआती अवस्था में ही उनमें जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, मंत्री ने घोषणा की कि ‘नो योर मेडिसिन’ मोबाइल एप्लिकेशन का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “स्थानीय भाषाओं में एंटी-डोपिंग जानकारी उपलब्ध कराने से देश भर के एथलीटों, कोचों और सहयोगी कर्मचारियों को प्रतिबंधित पदार्थों को बेहतर ढंग से समझने और सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।”

डॉ. मांडविया ने एनडीटीएल की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि “प्रयोगशाला में अंतरराष्ट्रीय एथलीटों के सैंपल की टेस्टिंग बढ़ाने के प्रयास किए जाने चाहिए।” उन्होंने कहा कि एनडीटीएल की बढ़ती तकनीकी क्षमताएं और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स का पालन इसे इंटरनेशनल एंटी-डोपिंग इकोसिस्टम में और ज़्यादा योगदान देने के लिए तैयार करता है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि डोपिंग भारतीय खेलों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है और इस बात पर ज़ोर दिया कि नियमों को लागू करने के साथ-साथ जागरूकता और शिक्षा भी ज़रूरी है।

डॉ. मांडविया ने एंटी-डोपिंग जागरूकता अभियानों को गांवों, स्कूलों, कॉलेजों और खेल संस्थानों सहित ज़मीनी स्तर तक बढ़ाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सिर्फ़ सज़ा देने से यह समस्या हल नहीं हो सकती और साफ़-सुथरे खेलों और साफ़-सुथरे खिलाड़ियों को बढ़ावा देने वाला एक सामाजिक आंदोलन ज़रूरी है।

एनडीटीएल, भारत की एकमात्र वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (वाडा) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला है, जो देश के एंटी-डोपिंग प्रोग्राम को सपोर्ट करने में अहम भूमिका निभाती है। प्रयोगशाला ने एंटी-डोपिंग रिसर्च और टेस्टिंग में योगदान देते हुए लगातार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी क्षमताओं और वैज्ञानिक विशेषज्ञता को बेहतर बनाया है।

प्रयोगशाला ने बड़े खेल आयोजनों में भी मदद की है, एडवांस्ड टेस्टिंग तरीकों जैसे कि ड्राइड ब्लड स्पॉट (डीबीएस) पर काम किया है, और हाल ही में एंटी-डोपिंग साइंस के लिए ज़रूरी रेफरेंस मटीरियल का सिंथेसिस किया है, जिससे टेस्टिंग क्षमताएं और मज़बूत हुई हैं और खेलों में फेयर प्ले को बढ़ावा मिला है।

इस बैठक में बिहार सरकार में शूटर और उद्योग एवं खेल मंत्री सुश्री श्रेयसी सिंह; सचिव (खेल) हरि रंजन राव; युवा मामले और खेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी; नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के प्रतिनिधि; जाने-माने वैज्ञानिक; और नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी के डायरेक्टर और सीईओ (प्रभारी) डॉ. पी. एल. साहू शामिल हुए।

 

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