मध्यप्रदेश कैबिनेट का लगभग 40 लाख किसानों को फसल ऋण पर 12 माह तक शून्य ब्याज की सुविधा देने का निर्णय केवल एक वित्तीय घोषणा नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम भी है.दरअसल, किसानों को अल्पकालीन फसल ऋण पर ब्याज का पूरा भार सरकार वहन करेगी, जिससे खेती की लागत कम होगी और किसानों को समय पर पूंजी उपलब्ध हो सकेगी. भारतीय कृषि आज भी बड़ी संख्या में छोटे और सीमांत किसानों पर आधारित है. खेती के लिए बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी जैसी आवश्यकताओं के कारण किसानों को हर सीजन में ऋण की आवश्यकता पड़ती है. यदि यह ऋण महंगे ब्याज पर मिले तो किसान की आय का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में चला जाता है. ऐसे में शून्य ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना किसानों को साहूकारों और अनौपचारिक कर्ज व्यवस्था से दूर रखने का प्रभावी माध्यम बन सकता है.
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि किसान समय पर कृषि निवेश कर सकेंगे. अक्सर देखा गया है कि पूंजी की कमी के कारण किसान बेहतर बीज या आधुनिक तकनीक का उपयोग नहीं कर पाते. परिणामस्वरूप उत्पादन और आय दोनों प्रभावित होते हैं. सस्ता या ब्याज मुक्त ऋण खेती को अधिक लाभकारी बनाने में मदद कर सकता है. यदि किसान की नकदी स्थिति मजबूत होगी तो उसका सीधा असर ग्रामीण बाजारों पर भी दिखाई देगा. कृषि उपकरण, उपभोक्ता वस्तुएं और स्थानीय व्यापार सभी को इसका लाभ मिलेगा.
हालांकि, ऐसी योजनाओं की सफलता केवल घोषणा से नहीं बल्कि प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है. यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऋण वास्तव में पात्र किसानों तक पहुंचे. कई बार छोटे किसानों की तुलना में बड़े और प्रभावशाली कृषक संस्थागत ऋण का अधिक लाभ उठा लेते हैं. सरकार और सहकारी बैंकों को पारदर्शी व्यवस्था विकसित करनी होगी ताकि लाभ का समान वितरण हो सके.
दूसरा महत्वपूर्ण प्रश्न वित्तीय अनुशासन का है. ब्याज मुक्त ऋण का उद्देश्य किसानों को राहत देना है, लेकिन इससे ऋण वापसी की संस्कृति कमजोर नहीं पडऩी चाहिए. यदि किसान समय पर ऋण चुकाते हैं तो बैंकिंग प्रणाली मजबूत रहती है और भविष्य में भी किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध होता है. इसलिए सरकार को जागरूकता और निगरानी दोनों पर समान ध्यान देना होगा.
इसके साथ ही यह भी समझना होगा कि केवल सस्ता ऋण कृषि संकट का स्थायी समाधान नहीं है. किसानों की वास्तविक समृद्धि बेहतर बाजार व्यवस्था, फसलों के उचित मूल्य, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, भंडारण क्षमता और कृषि प्रसंस्करण उद्योगों के विकास से आएगी. ऋण राहत एक सहायक उपाय है, लेकिन कृषि सुधारों की व्यापक प्रक्रिया का विकल्प नहीं हो सकती.
फिर भी वर्तमान परिस्थितियों में 40 लाख किसानों को शून्य ब्याज फसल ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय स्वागत योग्य कहा जाएगा. यदि इसका लाभ सही किसानों तक पहुंचता है और इसे कृषि क्षेत्र के अन्य सुधारों के साथ जोड़ा जाता है, तो यह केवल किसानों की आर्थिक मदद ही नहीं करेगा, बल्कि मध्यप्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा. किसान मजबूत होंगे तो प्रदेश की विकास यात्रा भी अधिक सशक्त होगी.
