भोपाल। प्रवचन सभा में मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर को यशस्वी, तपस्वी, तेजस्वी और मनस्वी बताते हुए कहा कि उनका तप केवल बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक समता से युक्त था। उन्होंने संघ का संचालन करते हुए भी कर्तृत्व भाव नहीं आने दिया। उनका चिंतन समाज व मानवता के कल्याण हेतु समर्पित रहा। मुनि श्री संधान सागर ने कहा, गुरु ने हमें गुरु समय दिया लघु बनने के लिए। क्षु. आदर सागर महाराज ने प्रतिदिन 15 मिनट स्वाध्याय का संकल्प लेने की प्रेरणा दी। 30 जून को 58वें दीक्षा दिवस पर विशेष गुणानुवाद सभा का आयोजन होगा।
गुणानुवाद सभा: आचार्य विद्यासागर का तप, चिंतन और प्रेरणा आंतरिक समता से थी युक्त
